लॉकडाउन और हार्ड इम्युनिटी ने लगाया कोरोना पर ब्रेक, अब नया वेरिएंट बनने से बढ़ेगा खतरा

डॉक्टरों ने कहा अगर वायरस ने बदला अपना स्वरूप ताे बढ़ सकता है खतरा

2020 को आई थी पहली अब 2021 को आई कोरोना की दूसरी लहर

By: shivmani tyagi

Updated: 06 Jun 2021, 06:35 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. मार्च 2020 को पहली और उसके बाद मार्च 2021 को आई कोरोना की दूसरी लहर मई के अंतिम दिनों में धीमी हो गई है। जून के पहले सप्ताह में कोरोना वायरस की ताकत काफी कम हो चुकी है। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण ( Corona virus ) से लोगों में हार्ड इम्युनिटी बनी और लॉकडाउन के कारण भी वायरस को पनपने का मौका नहीं मिल पाया है। अगर कोरोना का कोई नया वैरिंएंट बनता है तो यह तीसरी लहर ला सकता है।

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मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलोजिस्ट डॉक्टर अमित गर्ग का कहना है कि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर से पांच गुना खतरनाक साबित हुई है। लैब में संक्रमण दर 30 फीसद पार कर गई। माना जा सकता है कि 60-70 फीसद से ज्यादा लोगों को छूकर कोरोना वायरस निकल गया। इसीलिए नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हो गई। ज्यादातर लोगों में एंटीबॉडी बन जाने की वजह से वायरस को बढऩे के लिए जगह नहीं मिलती, ऐसे में बीमारी थमने लगती है। इसे ही हार्ड इम्युनिटी कहते हैं। 9 जून से होने वाले सीरो सर्वे में तस्वीर साफ हो जाएगी।


वैरिएंट बदला तभी बढ़ेगा संक्रमण
फिजिशियन डॉक्टर एनके शर्मा ने बताया कि वायरस एक समय बाद अपनी ताकत खोने लगता है, और एंटीजेनिक ड्रिफ्ट यानी हल्के बदलाव के साथ फिर तेजी से बढ़ता है। दूसरी लहर में वायरस हल्के बदलाव के साथ आया इसीलिए पिछली लहर में संक्रमित होने वाले भी इस बार बीमार पड़े। वर्तमान डल्टा वायरस ज्यादा संक्रामक था, ऐसे में गांवों तक संक्रमण पहुंच गया। ऐसे में माना जा सकता है कि हर्ड इम्युनिटी बनने से तीसरी लहर की गुंजाइश नहीं रहेगी। यह एक आरएनए वायरस है, जो गले में कालोनी बनाता है। लेकिन जब यह फेफड़ों में पहुंचता है तो खतरा बढ़ जाता है।

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फिजिशियन डॉक्टर तनुराज सिरोही का कहना है कि इस साल फरवरी-मार्च में लोगों ने बड़े पैमाने पर लापरवाही की। त्योहारों में शारीरिक दूरी का खयाल नहीं रखा गया। बाजारों में भीड़ उमड़ी, और नए म्यूटेंट वाले वायरस को मौका मिल गया। पिछली लहर से कई गुना संक्रामक होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग चपेट में आए, और मौतें भी ज्यादा हुईं। सख्ती से लाकडान का नतीजा रहा कि वायरस को और फैलने का अवसर नहीं मिला। हालांकि अब 60-70 फीसद लोगों में वायरस के प्रति एंटीबाडी बन गई होगी, ऐसे में आने वाले दिनों में बचाव जरूर मिलेगा।

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