मेरठ

#DebateinCollege: प्राचीन काल से चार भागों में बंटी शिक्षा, लेकिन यह दो विषय अब रह गए पीछे

खास बातें स्कूल-कालेजों में अनिवार्य हो ये शिक्षा तो निखरेगी प्रतिभा छात्रों ने एकसुर में उठाई कला और संगीत शिक्षा की मांग आईएएस और पीसीएस की तैयारी कर रहे छात्रों की राय

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Aug 24, 2019

मेरठ। कला और संगीत दोनों ही क्षेत्रों में देश का नाम विदेश में रोशन हुआ। कला में मकबूल फिदा हुसैन और अन्य कई हस्तियों ने जहां विदेश में अपनी कूची से भारतीय कला का लोहा मनवाया, वहीं देश के कई रसूखदार संगीत घरानों ने विदेश में अपने शास्त्रीय संगीत से लोगों का मन मोहा। पश्चिम बंगाल, उप्र, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली के संगीत राजघरानों ने कई ऐसे राग और शास्त्रीय धुनों का ईजाद किया जिसकी धुन में आज भी लोग खो जाते हैं। समय के साथ संगीत और कला से लोगों ने विमुख होना शुरू किया तो यह दोनों ही क्षेत्र बेरूखी का शिकार होने लगे।

कला और संगीत शिक्षा हो अनिवार्य

अब फिर से कला और संगीत को स्कूल और कालेजों में शिक्षा के रूप में अनिवार्य करने की मांग जोर पकड़ने लगी हैं। इस बारे में 'पत्रिका' ने मेरठ के एक प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट के छात्रों से इस बारे में उनकी राय जानने की कोशिश की। यह इंस्टीट्यूट आईएएस और पीसीएस के पाठयक्रमों की तैयारी करवाता है। आईएएस और पीसीएस की तैयारी कर रहे छात्रों ने एक सुर में यह मांग उठाई कि कला और संगीत को स्कूल और कालेज में अनिवार्य किया जाए।

बेहतर हो सकता है कॅरियर

छात्रा दिव्या ने बताया कि यह अनिवार्य होना जरूरी है। इससे छात्र अपने कल्चर के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। छात्रा अनु ने बताया कि बहुत से छात्र इस क्षेत्र में क्रिएटिव होते हैं। इस क्षेत्र में छात्रों का कॅरियर भी बेहतर हो सकता है। छात्र संजीव का कहना है कि कला हमारी संस्कृति से जुड़ता है जो हमें बताता है कि हम पहले कैसे रहते थे। आकाश नामक छात्र का कहना है कि हर कोई बच्चा किसी न किसी क्षेत्र में महारथ हासिल करता है। जो भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं उनको अच्छा प्लेटफार्म मिलेगा।

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Published on:
24 Aug 2019 03:12 pm
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