Weather Alert: बारिश के बाद बढ़ी ठंड, 15 दिसंबर से पड़ेगा घना कोहरा

Highlights

  • कोहरे ने केवल दो दिन ही मेरठ को किया है परेशान
  • 1981 से 2010 तक 24 दिन कोहरा पड़ने का है औसत
  • जलवायु परिवर्तन या प्रदूषण के दुष्प्रभाव के कारण नहीं पड़ा कोहरा

मेरठ। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद मौसम (Weather) में जहां ठंड बढ़ गई है, वहीं सर्दियों (Winter) के इस मौसम की शुरुआत के साथ कोहरे (Fog) ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है। मेरठ (Meerut) व उसके आसपास के जिलों में सोमवार से देहात के क्षेत्रों में कोहरा पड़ने लगा है। हालांकि, सर्दी के सीजन को आरंभ हुए दो माह हो चुके हैं, लेकिन राहत है कि अभी तक केवल पिछले दो रातों से ही कोहरे ने मेरठ को परेशान किया है।

यह है वजह

दिसंबर में अभी तक कोहरे की चादर नहीं बिछी है, जबकि 1981 से 2010 तक के सीजन का आंकलन करने पर 24 दिन कोहरा पड़ने का औसत है। इनमें ज्‍यादातर दिन दिसंबर और जनवरी के होते हैं। मौसम वैज्ञानी आरएस सेंगर के अनुसार, जलवायु परिवर्तन या प्रदूषण के दुष्प्रभाव के कारण जनपदवासियों का कोहरे से सामना नहीं हुआ है। 2 दिसंबर (December) को मौसम विभाग ने कोहरा पड़ने की पुष्टि की थी। पहले नवंबर में एक और दिसंबर में आठ दिन कोहरे का औसत होता था।

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पहाड़ों पर कम हो रही है बर्फबारी

डाॅ. सैंगर का तर्क है कि इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी कम हो रही है। बर्फ की चादर ओढ़े चोटियों से होते हुए जो हवा मैदानी भागों की ओर बहती है, उससे ही तापमान में तेजी से गिरावट होती है। विशेष रूप से रात का तापमान तेजी से गिर जाता है। ऐसे में वातावरण में व्याप्त नमी संघनित होकर कोहरे के रूप में छा जाती है। ऐसे में दृश्यता कम हो जाती है। 100 मीटर के छायरे में जब कार या बाइक सड़कों पर नहीं दिखाई देती हैं, तब कोहरा पड़ने की पुष्टि होती है। उन्‍होंने कहा कि 15 दिसंबर से घना कोहरा पड़ सकता है।

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यह कहा मौसम विशेषज्ञ ने

कृषि विश्‍वविद्यालय के डॉ. यूपी शाही ने बताया कि कोहरे को अच्छी मौसमी घटना नहीं माना जाता है। इससे सड़क हादसों में इजाफा होता है, जबक‍ि ट्रेनों की रफ्तार कम हो जाती है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण मौसमी घटना का न होना बड़े जलवायु परिवर्तन का संकेत है।

sharad asthana
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