सपा-बसपा के गठबंधन में यहां अखिलेश यादव को लगेगा बड़ा झटका, बड़ी दावेदारी में उनका खास सिपाही हो सकता है बेटिकट

मिशन 2019 के लिए टिकट बंटवारे में करना पड़ेगा मुश्किलों का सामना

 

By: sanjay sharma

Published: 30 Dec 2018, 02:30 PM IST

मेरठ। मिशन 2019 को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। सपा-बसपा ने मिलकर साथ निभाने का कदम बढ़ाया है। अभी दोनों पार्टियां कदम ताल करती भी दिखार्इ दे रही हैं, लेकिन जिस तरह समय बीतेगा, दोनों पार्टियाें को दुश्वारियां झेलनी पड़ेंगी, दाेनों ही पार्टियों में अपने चहेतों को टिकट दिलवा पाएंगे भी नहीं, इस पर रस्साकशी साफ दिख रही है। मायावती को बिजनौर पिछले दिनों एेसा ही कुछ देखने को मिला है, जब बिजनौर लोक सभा सीट गठबंधन के कारण निश्चित मानी जाने के कारण सपा की पूर्व विधायक रुचि वीरा ने सपा छोड़कर बसपा ज्वाइन की, इससे बसपा में हड़कंप मच गया आैर उन्होंने रुचि वीरा पर आराेप लगाने शुरू कर दिए थे। आरोपों के क्रम में मायावती ने बिजनौर सीट के प्रबल दावेदार चांदपुर के पूर्व बसपा विधायक इकबाल ठेकेदार आैर मुख्य जोन इंचार्ज मुरादाबाद मंडल जितेंद्र सागर को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब रुचि वीरा की भी जांच चल रही है। जाहिर है, यह उठापठक चहेतों को टिकट के लिए हो रही है। यही स्थिति अब मेरठ में भी सपा आैर बसपा में गठबंधन के कारण यहां से दिए जाने वाले टिकट को लेकर होगी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जबरदस्त झटका मिल सकता है।

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सपा आैर बसपा में टिकट के कर्इ दावेदार

लोक सभा चुनाव 2019 को लेकर मेरठ से टिकट दावेदारी में सपा-बसपा हार्इकमान को अंदरुनी उठापठक आैर विरोध का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, सपा-बसपा गठबंधन में बसपा का पलड़ा भारी हाेता दिख रहा है, क्योंकि नगर निगम मेयर चुनाव में मुस्लिम व दलित वोट बैंक ने भाजपा उम्मीदवार व अब राज्य सभा सांसद कांता कर्दम को करारी शिकस्त दी थी। मेयर पद पर बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता शर्मा ने विजय हासिल की थी। योगेश व सुनीता की वोटरों पर अच्छी पकड़ भी है आैर योगेश मायावती के खास सिपाही भी माने जाते हैं। हालांकि बसपा में टिकट के दावेदारों में पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी, पिछले उम्मीदवार शाहिद अखलाक भी हमेशा रहे। लेकिन मौजूदा स्थिति में योगेश वर्मा भारी हैं।

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अखिलेश के खास सिपाही अतुल प्रधान

लोक सभा चुनाव में सपा से दावेदारी अतुल प्रधान की मजबूत है। इसकी वजह यह है कि अखिलेश यादव के अतुल खास सिपाही हैं। मुख्यमंत्री कार्यकाल में अतुल प्रधान ने फलावदा में सिर्फ अपने दम पर धमाकेदार सफल रैली कराकर अखिलेश उसका कर्ज भी टिकट देकर उतारना चाहेंगे। साथ ही लखनउ पहुंचकर अतुल प्रधान अखिलेश यादव से सीधे बात करते हैं, वैसा सपा के कद्दावर नेता भी नहीं कर पाते। पिछले तीन-चार वर्षों में अतुल से बात करके अखिलेश जिस तरह मेरठ को लेकर निर्णय लेते हैं, उससे माना जा सकता है कि किस कदर अखिलेश के लिए खास हैं अतुल। अतुल की मेरठ की जनता में खासी पकड़ भी है। इसलिए अखिलेश अतुल को मेरठ से टिकट देने की तैयारी भी कर रहे हैं।

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टिकट को लेकर होगा टकराव

मायावती अपने खास योगेश वर्मा आैर अखिलेश अपने सिपाही अतुल प्रधान को मेरठ से टिकट दिलाने में आमने-सामने आ सकते हैं, क्योंकि दोनों हार्इकमानों में दोनों के अपने-अपने पक्के दावे हैं। इसलिए सपा-बसपा गठबंधन में यहां की सीट को लेकर खटास जरूर आएगी आैर विरोध व उठापठक भी दिखेगी। दोनों पार्टियों में टिकट दावेदारी को लेकर जो अफरातफरी मचेगी वह अलग। माना जा रहा है इसमें अखिलेश यादव को परेशानी होगी, क्योंकि उनके चहेते अतुल प्रधान को नगर निगम में बसपा की जीत का रिकार्ड उन पर भारी पड़ेगा।

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