बंदरों के आतंक से खौफ में आए लोग, 20 दिन में 124 लोगों को बना चुके शिकार

Highlights:

-बंदरों को भगाने के लिए ली जा रही लंगूर की मदद
-बंदरों के खौफ से मवाना वासी परेशान
-कई बच्चे और महिलाएं अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं

By: Rahul Chauhan

Published: 16 Oct 2020, 03:21 PM IST

मेरठ। जिले में इन दिनों लोग उपद्रवी बंदरों की दहशत खौफजदा है। उपद्रवी बंदरों के झुंडों के खौफ से बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालात यह है कि सिर्फ चंदौसी में ही बंदर 20 दिन में 124 लोगों पर हमला कर जख्मी कर चुके है। बंदरों के अचानक हमले और काटने से गंभीर घायल कई बच्चे और महिलाएं अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे है।

मवाना, सरधना और मेरठ महानगर में नगर पालिका और निगम के अधिकारी बंदरों को पकड़ने के लिए बन बिभाग से अनुमति न मिलने की सफाई देते हैं। हालात यह है कि अब लोगों ने खुद ही बंदरों के झुंड को इलाके से खदेड़ने के लिए लंगूर की मदद लेनी शुरू कर दी है। कमोवेश पूरे जनपद में यही हालात है। दरअसल जनपद में निगम की लापरबाही से मवाना और सरधना में उपद्रवी बंदरों का खौफ है।

बंदरों के झुण्ड अक्सर सड़क पर गुजरने बाले राहगीरों और आबादी बाले इलाकों में बच्चों,बुजुर्गो और महिलाओं को अपना शिकार बनाते हैं। सामुदायिक अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर नीरज ने बताया की 21 अगस्त से 12 सितम्वर के बीच ही बंदर ने 100 से अधिक लोगों को काटकर जख्मी किया। इन सभी 124 लोगों का सामुदायिक अस्पताल में रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया है। बंदरों के हमले से घायल लोगों में कई महिलाओं और बच्चों की हालत गंभीर है। जो प्राइवेट अस्पतालों में भी अपना इलाज करा रहे हैं।

शहर में बढ़ रही बंदरों की तादाद और बंदरों के खौफ निजात दिलाने के लिए लोग कई बार निगम के अफसरों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अधिकारी बन विभाग से बंदर पकड़ने की इजाजत न मिलने बात कहकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। उपद्रवी बंदरों के खौफ से इलाके में हालात यह है की बंदरो को खदेड़ने के लिए लंगूर की मदद ली जा रही है।

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