कोविड टीके के लिए मुस्लिम धर्मगुरु और अफसर कर रहे जागरूक

अफवाहों पर ध्यान न देने की कर रहे अपील, मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सुस्त है टीकाकरण की रफ्तार, अब जागरूकता ही एक मात्र सहारा

By: shivmani tyagi

Updated: 13 Jun 2021, 07:48 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. ( meerut news ) कोरोना से बचाव के टीके के प्रति मुस्लिम इलाकों में कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। यही कारण है कि लोग टीका करण करवाने से परहेज कर रहे हैं। मुस्लिम बस्तियों में लोग टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। खासकर 45 साल से ज्यादा उम्र के लोग टीकाकरण केंद्रों पर बहुत ही कम पहुंच रहे हैं। अब कोविड टीकाकरण में तेजी लाने के लिए पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मुस्लिम धर्म गुरु की मदद ली जा रही है। अधिकारी ई-रिक्शा में बैठकर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में घूम कर टीकाकरण के लिए प्रचार कर रहे हैं। लोगों को कोरोना वैक्सीन ( covid vaccine ) के प्रति जागरुक करने के साथ ही उनको टीका भी लगवा रहे हैं। इतना ही नहीं धर्मगुरु भी लोगों से टीका लगवाने का आह्वान कर रहे हैं।


मुस्लिम बस्तियों में टीकाकरण ग्राफ
अगर मेरठ महानगर की बात की जाए की ताे जाकिर कॉलोनी में टीकाकरण केंद्र पर तीन दिन में महज 53 और इस्लामाबाद कालोनी में महज 42 लोग ही पहुंचे। मवाना और सरधना के मुस्लिम इलाकों में भी ऐसी ही स्थिति है। इसके अलावा जहां मिश्रित आबादी है वहां भी मुस्लिम तबके के लोग टीकाकरण कराने के लिए कम आ रहे हैं। उम्मीद थी कि रमजान समाप्त होने के बाद मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में टीकाकरण की रफ्तार बढ़ेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रमजान के बाद रफ्तार और धीमी ही हुई है।

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इसी के चलते प्रशासनिक - पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। अब धर्मगुरुओं से भी अपील करवाई जा रही है। इसका असर अब होना शुरू हुआ है जिसके चलते इस्लामाबाद, जाकिर कॉलोनी, तारापुरी और मकबरा डिग्गी में 50-50 से ज्यादा लोग टीकाकरण कराने पहुँचे। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में टीकाकरण के मामले में 18 साल से ज्यादा और 45 से कम उम्र वाले 70 से 80 लोग प्रतिदिन टीका लगवा रहे हैं हालांकि लक्ष्य किसी भी दिन पूरा नहीं हो पाया जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉक्टर प्रवीण गौतम ने बताया कि अफवाह के कारण लोग टीका लगवाने से बच रहे हैं। जिले में मुस्लिम बहुल क्षेत्र तथा दलित क्षेत्रों में टीकाकरण का प्रतिशत काफी कम है। ऐसा अफवाहों के कारण हो रहा है। टीकाकरण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इन क्षेत्रों में सामाजिक धार्मिक तथा राजनीतिक संगठनों से सहयोग प्राप्त कर रहे हैं ताकि क्षेत्रों के अंदर टीकाकरण का प्रतिशत बढ़ाया जा सके।

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