सात सुरों को वैज्ञानिक ढंग से सिद्ध करने वाले NASA वैज्ञानिक डा. रमेश चंद्र त्यागी का निधन

Highlights:

-डा. त्यागी का चल रहा था निजी अस्पतला में इलाज
-मल्टी आर्गन फल्योर के चलते हुआ निधन

By: Rahul Chauhan

Updated: 02 Aug 2020, 02:54 PM IST

मेरठ। देश के मिसाइल की आंख कहे जाने वाले इंफ्रा रेड डिटेक्टर को देश में ही निर्मित करने के मिशन पर भारत लौटे नासा के पूर्व वैज्ञानिक और मेरठ निवासी डॉ. रमेश चंद त्यागी का शनिवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 87 वर्षीय डॉ. त्यागी पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और निजी अस्पताल में भर्ती थे। मल्टी ऑर्गन फेल्योर के चलते उनका निधन हुआ। डॉक्टर रमेश चंद त्यागी के साथ प्रोफेसर बीरपाल सिंह, डॉक्टर रमेश चंद त्यागी फिजिक्स डिपार्टमेंट चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जुड़े हुए थे। प्रो

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फेसर बीरपाल ने डॉक्टर रमेश चंद त्यागी के साथ बिताए समय को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 10 से अधिक पेपर उनके साथ लिखे हैं। प्रोफेसर वीरपाल ने बताया कि डॉ. त्यागी ने अपने साथी डॉ. एएल जैन के साथ मिलकर छह महीने में ही स्वदेशी इंफ्रा रेड डिटेक्टर विकसित कर लिया था। लेकिन परीक्षण से ठीक पहले अप्रत्याशित ढंग से यह प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया। वह मेरठ में अपने भतीजे पंकज त्यागी के साथ रह रहे थे। उनके दोनों बेटे अमेरिका में हैं। निधन के बाद उनकी इच्छा के अनुरूप डॉ. त्यागी का अंतिम संस्कार ब्रजघाट पर किया गया।

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सात सुरों की समझाई अलग आवृत्ति :—

मेरठ में रहते हुए उन्होंने एक दशक में म्यूजिकल स्केल पर 70 पेज का रिसर्च पेपर लिखा। इसमें सात सुर सारेगामापाधानी की आवृत्ति को पाई (22/7) के प्रयोग से गणितीय सिद्धांत से साबित कर दिया। माना जाता है कि प्रत्येक सुर की अपनी विशेष आवृत्ति है। लेकिन इसके वैज्ञानिक प्रमाण नहीं थे। डॉ. त्यागी का यह रिसर्च दुनिया भर में मील का पत्थर साबित हुआ।

डा0 वीरपाल ने बताया कि डॉ. आरसी त्यागी 1997 में चौ. चरण सिंह विवि के फिजिक्स विभाग से जुड़ गए। यहां तत्कालीन एचओडी प्रो. टीसी शर्मा उनके मित्र थे। दोनों ने एकसाथ मिलकर रिसर्च आरंभ की। टीसी शर्मा के बाद वे प्रो.वीरपाल सिंह के साथ जुड़े। प्रो. वीरपाल सिंह के अनुसार उन्होंने डॉ. राकेश कुमार और डॉ. ज्योत्सना सहित कुल दो छात्रों को पीएचडी कराई।

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