70 साल पहले ध्यानचंद से मिला हॉकी का गुर आज भी याद है इस शख्स को!

1947 से 1956 तक मेरठ में रहें हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, मेरठ की हाॅकी का स्तर देश में सर्वश्रेष्ठ बताया था

By: Rajkumar

Updated: 30 Aug 2017, 04:54 PM IST

संजय शर्मा,

मेरठ। दुनिया में हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को करीब से देखने आैर खेलने का सौभाग्य सबको नहीं मिला आैर जिन्हें मिला वे अब नहीं रहे, लेकिन मेरठ में एक एेसे शख्स हैं। जिसने मेजर ध्यानचंद के साथ मैदान में बहुत स्टिक वर्क किया आैर उनसे गुर सीखे थे। पूर्व हाॅकी खिलाड़ी श्रीपाल शर्मा को हाॅकी के इस जादूगर का मेरठ में बिताया एक-एक पल याद है। उन्होंने कहा कि एेसा हाॅकी खिलाड़ी दुनिया को कभी नहीं मिल सकता। आज जो लोग खेल दिवस पर आैपचारिकता निभा रहे हैं, उन्हें नहीं पता ध्यानचंद का मतलब क्या है। ध्यानचंद को समझ जाएंगे तो खेल का स्तर खुद ही ऊपर उठने लगेगा।

सबसे पहले आए यंग्स क्लब में

बुजुर्ग पूर्व हाॅकी खिलाड़ी श्रीपाल शर्मा ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब पूरा देश डिस्टर्ब हो गया था तो सेना की पंजाब रेजीमेंट के सिपाही ध्यानचंद चाहते थे कि एेसा सेंटर मिले। जिसमें वह फौज की नौकरी करते रहें आैर हाॅकी भी चलती रहे। उन्होंने इसके लिए मेरठ को चुना। उन्होंने बताया कि 1947 में यहां आने के दो-तीन दिन बाद ही ध्यानचंद मेरठ यंग्स क्लब के ग्राउंड पर आ गए थे। वहां सीनियर व जूनियर खिलाड़ियों से उन्होंने कहा कि मैं ध्यानचंद हूं आैर आपको हाॅकी में कुछ नया गुर सिखाऊं क्या। इस पर सब हैरत में पड़ गए आैर सबने उनके पैर छू लिए। उन्होंने सबको रेजीमेंट के ग्राउंड पर अपनी हाॅकी स्टिक के साथ आने के लिए कहा। अगले दिन सभी पहुंच गए आैर उन्होंने हाॅकी के वे गुर सिखाए, जो बड़े से बड़े खिलाड़ी भी नहीं सीख पाए। पूर्व हाॅकी खिलाड़ी श्रीपाल शर्मा ने बताया कि वह हमसे कहते थे कि 'डी' में कहीं भी गेंद रख लें आैर गोल पोस्ट के सामने कहीं निशान लगा दें या कपड़ा रख लें। वह उसी जगह से गेंद गोल पोस्ट में भेजेंगे आैर यही होता भी था।

इंग्लैंड आैर जर्मनी से प्रस्ताव

ध्यानचंद से नौ साल हाॅकी के गुर सीखने आैर खेलने वाले श्रीपाल शर्मा ने बताया कि वह अक्सर उन्हें अपने अनुभव बताते रहते थे। एक बार वह इंग्लैंड में खेल रहे थे, तो उनका एक गोल मिस हो गया। ध्यानचंद ने कहा कि एेसा नहीं हो सकता, जब गोल पोस्ट को नापा तो वह छोटा मिला। इस पर इंग्लैंड की महारानी ने उन्हें इंग्लैंड आर्मी में बड़ा पद देने का प्रस्ताव दिया था, जाे उन्होंने ठुकरा दिया। इसी तरह हिटलर ने भी उन्हें अपने यहां आने का प्रस्ताव दिया था। श्रीपाल शर्मा ने बताया कि दादा ध्यान चंद के साथ बिताए पलों को वह कभी नहीं भूल सकते हैं। उनसे उन्होंने काफी कुछ सीखा।

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