Meerut : 50 के पार पहुंचा डेंगू से पीड़ितों का आंकड़ा, वायरल के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी

कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारी में व्यस्त स्वास्थ्य विभाग की सांसें अब डेंगू और वायरल ने फुलाई।

By: lokesh verma

Published: 14 Sep 2021, 11:02 AM IST

मेरठ. कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारी में व्यस्त स्वास्थ्य विभाग की सांसें अब डेंगू और वायरल ने फुला दी है। हालात यह हैं कि डेंगू का आंकड़ा जिले में 50 मरीजों से अधिक पहुंच गया है। वहीं वायरल से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। वायरल और डेंगू मरीजों की खोज के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर सर्वे कर रही है और लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। वायरल से पीड़ित मरीजों को दवाई दी जा रही है और उनकी खून की जांच की जा रही है।

मंडलीय अधिकारी डाॅ. अशोक तालियान ने बताया कि संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर व डेंगू के हमले के चलते सात सितंबर से विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कार्य कर रही हैं। जांच में जो मरीजों मिल रहे हैं, उनका उपचार सीएचसी और अन्य अस्पताल में करवाया जा रहा है। जांच के साथ ही लोगों को स्वच्छता व बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बुखार और अन्य कारणों से बीमार 130 लोग अस्पताल में भर्ती किया गया है। वहीं, प्रदेश में डेंगू के कारण दो मौतों का मामला सामने आया है।

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अधिकांश पीड़ित बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं

मेरठ जिला पिछले तीन सप्ताह से डेंगू और घातक वायरल फीवर से जूझ रहा है। इनमें अधिकांश पीड़ित बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं हैं। डेंगू, मलेरिया समेत मौसमी बीमारियों ने कहर बरपा रखा है। शासन ने पत्र लिखकर डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर गतिविधियों में तेजी लाने पर जोर दिया है। शासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कीट विज्ञान निगरानी, स्रोत में कमी लाने संबंधी गतिविधियों और त्वरित वेक्टर नियंत्रण उपायों को क्रियान्वित किया जाना चाहिए।

मानसून के दौरान अधिक फैलती है बीमारी

एडी मेरठ डाॅ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि मंडल में मेरठ सहित अन्य जिलों में डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों (वीबीडी) के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। इन रोगों का प्रसार और संचरण पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है तथा वेक्टर प्रसार के लिए अनुकूल वातावरण के कारण मानसून और मानसून के बाद की अवधि के दौरान इनका संचरण अधिकतम होता है। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों को खत्म करने के लिए वेक्टर (मच्छर) की संख्या में कमी लाने का निरंतर प्रयास किया जाए।

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