पब्लिक स्कूलों को खुली चेतावनी, फीस के लिए नाम काटा ताे करेंगे घेराव

फीस के कारण बच्चे का काटा नाम तो होगा स्कूल का घेराव, कोरोना संक्रमण काल में स्कूलों ने जारी किया फीस जमा करने का फरमान, प्रशासन की खामोशी से अभिभावकों में रोष

By: shivmani tyagi

Updated: 28 May 2021, 07:42 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ ( meerut news ) कोरोना काल के दौरान स्कूल ( School ) फीस के मामला एक बार फिर से तूल पकड़ रहा है। फीस काे लेकर शासन की ओर से काेई निर्देश नहीं मिले ताे स्कूलों ने फीस जमा कराने का फरमान सुनाते हुए साफ कह दिया कि अगर फीस जमा नहीं की तो स्कूल से बच्चों का नाम काट देंगे। स्कूलों ( public schools ) की इस मनमानी के खिलाफ अब अभिभावक संघ ने माेर्चा खोल दिया है। अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर किसी भी बच्चे का फीस के लिए नाम काटा गया ताे स्कूल में तालाबंदी कर देंगे।

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कोरोना वायरस लाखों लोगों को संक्रमित कर चुका है और हजारों की जान ले चुका है। इसके कारण लाखों लोगों की नौकरी जा चुकी है और वे बेरोजगार हो चुके हैं। ऐसे में व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों पर भी ताले लटक गए हैं और बीते एक साल से ज्यादा के अंतराल में बहुत कम समय के लिए स्कूल खोले गए। स्कूलों ने कोरोना काल की फीस जमा करने के लिए अभिभावकों से आग्रह किया तो उन्होंने कोरोना काल में बंद पड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों की दुहाई देते हुए फीस नहीं जमा कराई । ऐसे में अब उत्तर प्रदेश के स्कूल फीस जमा करने को लेकर अपनी आस्तीनें चढ़ा ली हैं। स्कूलों की तरफ से अभिभावकों को साफ तौर पर हिदायत दे दी गई है कि एक तय समय सीमा के अंदर फीस न जमा करने पर छात्रों का नाम स्कूल से काट दिया जाएगा ।

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कॉन्फ़िगरेशन आफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स में उत्तर प्रदेश के करीब 1300 स्कूल शामिल हैं जिन्होंने बीते दिनों अभिभावकों के द्वारा कोरोना काल की फीस न जमा करने को लेकर मंथन किया। इस दौरान स्कूलों पर आर्थिक संकट खड़ा होने के बात रखी गई। स्कूलों की तरफ से साफ तौर पर कहा गया कि अगर अभिभावक फीस जमा नहीं करेंगे तो स्कूल अपना खर्चा कहां से उठाएगा जिसमें कि शिक्षकों का वेतन भी शामिल हैं। इसलिए स्कूलों के द्वारा ये फैसला किया गया है कि सरकार के निर्देश के अनुसार फीस बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। साथ ही अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए समय भी दिया जाएगा और अगर समय सीमा में अभिभावक स्कूल की फीस जमा नहीं करते उनके बच्चे का नाम काट दिया जाएगा। ऐसे लोग जिनका कारोबार कोरोना काल में भी चलता रहा वो लोग भी अपने बच्चों की स्कूली फीस जमा नहीं कर रहे हैं जिससे स्कूलों का संचालन नहीं हो पा रहा है।

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ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूलों के द्वारा ऐसा कौन सा मानक बनाया जा रहा है कि जिसके जरिए इन लोगों के कारोबार की जांच की जाएगी और उसके जरिए बाकायदा सूची बनाकर अभिभावकों को सूचित करने का काम करेगा जिसके ज़रिए स्कूल की फीस जमा हो सके। वही कोरोना काल के दौरान की स्कूली फीस जमा करने के मुद्दे पर अभिभावक संघ का कहना है कि कोरोना काल में किसी भी व्यक्ति का कारोबार नहीं चल पाया। जो लोग दूसरे व्यापारियों की दुकान पर काम कर रहे थे उन्हें भी पूरी तनख्वाह नहीं मिल पाई है। इसलिए स्कूलों को इस तरीके का तानाशाही भरा फरमान नहीं जारी करना चाहिए बल्कि स्कूलों को अभिभावकों को बच्चों की स्कूल फीस भरने में रियायत देनी चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि स्कूलों को सिर्फ 25% ही फीस देनी चाहिए क्योंकि बच्चों ने ना तो स्कूल परिसर में किसी सुविधा का लाभ उठाया और पढ़ाई भी ऑनलाइन ही की है। इन लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर स्कूलों ने किसी भी बच्चे का नाम काटने जैसा काम किया तो हो स्कूल खिलाफ आंदोलन छेड़ देंगे और शिक्षा विभाग के जुड़े अधिकारियों के दफ्तरों पर धरना देने के साथ-साथ स्कूलों पर तालाबंदी का भी काम करेंगे।

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