केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने किया दुनिया के पहले अर्हं ध्यान केंद्र का शिलान्यास

Highlights

- स्वास्तिक स्वरूप में बनाया जाएगा अर्हं दर्शनम केंद्र

- महाभारत काल से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का किया भ्रमण

- जिलाधिकारी मेरठ को हस्तिनापुर से संबंधित दिए निर्देश

By: lokesh verma

Published: 25 Feb 2021, 03:55 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. हस्तिनापुर (Hastinapur) पहुंचे केंद्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिह पटेल (Union Minister of Culture and Tourism Prahlad Singh Patel) ने अर्हं दर्शनम केंद्र (Arhn Darshanam Kendra) का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने महाभारत काल से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कई विभागों के अधिकारियों के साथ महाभारत कालीन एतिहासिक नगरी में मौजूद प्राचीन पांडव टीले का भ्रमण किया। साथ ही यहां पर मौजूद अमृतकूप, रघुनाथ महल, प्राचीन जयंती माता शक्ति पीठ मंदिर, प्राचीन पांडेश्वर मंदिर आदि का भ्रमण कर पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से इनकी स्थिति के बारे में जाना। उन्होंने इनके संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं को जल्द ही धरातल पर लाने के निर्देश दिए।

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जिलाधिकारी के बालाजी को केंद्र सरकार द्वारा हस्तिनापुर में बनाए जाने वाले म्यूजियम के लिए जल्द से जल्द जमीन को चिन्हित कर विभाग को आवंटित करने की बात कही। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अर्हं दर्शनम केंद्र का शिलान्यास किया और उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने भारत सरकार की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही कहा कि महाभारत कालीन एतिहासिक नगरी एक प्राचीन विरासत है, जिसे संरक्षित करना होगा। इसके लिए भारत सरकार संकल्पित है। हमारे देश को आज भी विश्व गुरु के नाम से जाना जाता है, इसलिए भारत में वह हर चीज है जो अन्य देशों में नहीं है। इस अवसर पर उनके साथ मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल, राष्ट्रीय पथिक सेना के अध्यक्ष मुखिया गुर्जर, भाजपा के जिला अध्यक्ष अनुज राठी के अलावा अन्य भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

तीन हेक्टेयर में 100 करोड़ से होगा निर्माण

बता दें कि तीन हेक्टेयर भूमि पर हस्तिनापुर में बनने वाला अर्हं दर्शनम केंद्र विश्व का पहला केंद्र होगा। इस सौ करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। स्वास्तिक स्वरूप इस केंद्र में श्रामन पद्धति से जीवन जीने की कला के साथ शंति प्राप्ति का बोध पांच क्रियाओं के माध्यम से कराया जाएगा।

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