इस क्रांतिकारी महिला ने कान्वेंट स्कूल में बच्चों को भेजने से कर दिया था मना, देखें वीडियो-

पुण्य तिथि पर वेबिनार में बुद्धिजीवी बोले- हजारा बीवी ने आजादी की लड़ाई में हिला दी अंग्रेजी नींव

By: lokesh verma

Published: 16 Jun 2021, 05:15 PM IST

Meerut, Meerut, Uttar Pradesh, India

मेरठ. आजाद भारत में जो हम आजादी के साथ सांस ले रहे हैं वह यूं ही नहीं है इसको आजाद कराने में हमारे हिंदुस्तानी भाइयों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। जो आज भी इतिहास में सोने के पानी से लिखी हुई है, लेकिन साथ ही साथ जहां देश की आजादी के तीन दौर हैं जंग आजादी, जद्दोजहद आजादी और तहरीक ए आजादी। इन तीनों ही आजादी की लड़ाई में पुरूषों के साथ साथ महिलाओं ने भी उस समय बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। यह बातें पश्चिमी उप्र अधिवक्ता संघ के मेरठ यूनियन के अध्यक्ष और गददी समाज वेलफेयर के अध्यक्ष अब्दुल वाहब ने हजारा बीवी की पुण्य तिथि के मौके पर आयोजित एक वेबिनार में कही। इस वेबिनार में देश भर से बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

अब्दुल वहाब ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का झंड़ा बुलंद करने वाली महिलाओं में से एक नाम हजारा बीवी का भी है। वह इंदौर जिले के गांव में पैदा हुई उनके पति मौहम्मद इस्माइल गांधी जी के काफी नजदीक रहे। आजादी की लड़ाई व खादी आंदोलन में वह बराबर के भागीदार थी। पति से प्रभावित होकर हजारा बीवी ने भी हमेशा खादी पहनी और हिंद की आजादी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि 1948 में हजारा बीबी के पति का देहांत हो गया। पति के देहांत से हजारा बीवी के हौसले पस्त नहीं हुए, बल्कि इरादे और बुलंद हुए और उन्होंने इस लड़ाई को बढ़-चढ़कर अगले अंजाम तक पहुंचाया। हद तो यह है कि अंग्रेज और अंग्रेजी भाषा से उन्हें इतनी नफरत थी जब उनके बच्चों के एडमिशन की बात आई तो लोगों ने उनसे उनके बच्चों के एडमिशन के लिए अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में दाखिला लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला हिंदी मीडियम के स्कूल में कराया।

हजारा बीवी ने अपने पति के देहांत के बाद उन्होंने अपने आप खादी की दुकान चलाई। गांधीजी के नजरिए को आगे बढ़ाने की कोशिश की हद तो यह है कि जब सरकार ने उनके पति का नाम देशभक्तों की सूची में लिखा तो उन्हें जमीन देने की कोशिश की गई। हजारा बीवी ने जमीन लेने से साफ मना कर दिया और कहा कि हिंदुस्तान की आजादी मैं जमीन के टुकड़े से उसका मोल नहीं नापा जा सकता लिहाजा मैं जमीन को नहीं लूंगी। इस तरह हजारा बीवी ने तहरीक ए आजादी ए हिंद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया 16 जून 1994 को इनका इन्तकाल हो गया। उन्होंने कहा कि हमें भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

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