योगी जी कोरोना काल में ये है निजी स्कूलों के शिक्षकों हाल, सेलरी के लिए मुंह खोला तो नौकरी गई, तनाव में आए तो जान

Highlights
- छह महीने से अपनी सेलरी के लिए प्रिसिंपल के पास फोन करता रहा डांस टीचर

- तनाव के चलते डांस टीचर आशीष ने कर ली आत्महत्या

- स्कूलों की मनमानी से तनाव में दिन काट रहे अधिकांश शिक्षक

By: lokesh verma

Published: 25 Aug 2020, 12:13 PM IST

मेरठ. कोरोना काल में पब्लिक स्कूलों की मनमानी बढ़ गई है। अब अभिभावक के साथ ही स्कूलों में कार्यरत अध्यापक भी प्रबंधन तंत्र की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। दीवान स्कूल के डांस टीचर आशीष के मौत के बाद अब स्कूल प्रबंधन तंत्र की तानाशाही पर सवाल उठने लगे हैं। आशीष स्कूल को पिछले सात सालों से अपनी सेवा दे रहा था। आत्महत्या के बाद जब उसके परिजन स्कूल प्रबंधन से मिलने गए तो उन्होंने परिजनों से मिलने तक की ज़रूरत महसूस नहीं की। परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। पुलिस ने भी तहरीर आने पर ही आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।

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बता दें कि दिल्ली रोड स्थित दीवान इंटरनेश्नल स्कूल में कोरियोग्राफ़र के पद पर नौकरी करने वाला आशीष बेहद जिंदादिल इंसान था। लेकिन, स्कूल ने पिछले 6 महीने से उसे सेलरी नहीं दी थी। जिसके बाद आर्थिक स्थिति नाजुक होने और हताश होने पर आशीष ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि आशीष रोज ही स्कूल की प्रिंसपल व अन्य लोगों को तनख्वाह देने के लिए फोन किया करता था, लेकिन वहां से केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। बताया जा रहा है कि आशीष ने एक बाइक फाइनेंस करवाई थी, जिसकी किश्तें भी पिछले पांच महीनों से नहीं भरी थी। आशीष के परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है।

स्कूलों मे भी जारी है अव्यवस्था का आलम

अपने टीचरों को तनख्वाह समय पर नहीं देने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। कई स्कूलों के टीचरों ने ऑफ द रिकार्ड जानकारी दी है कि उन्हें भी पिछले कई महीनों से सेलरी नहीं दी गई है। जिनकों दी गई है वह जितनी तय है उससे आधी मिली है। आवाज उठाने पर नौकरी जाने का खतरा बना रहता है।

ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर भी हो रहा है खेल

इन दिनों स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा जारी है, लेकिन इसका लाभ छात्रों को मिल रहा है या नहीं इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। कुछ परिजनों ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों को कुछ समझ नहीं आता है। कई घरों में तो फोन भी महज एक ही है तो ऐसे में उनके बच्चों को किस तरह से ऑनलाइन शिक्षा मिलेगी, यह सवाल उठ रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि स्कूलों ने केवल फीस लेने के नाम पर ऑनलाइन शिक्षा का नाटक चला रखा है।

स्टाफ को तनख्वाह देने के नाम पर अभिभावकों से ली जा रही फीस

यह भी सामने आया है कि अभिभावकों को फीस जमा कराने के लिए जो मैसेज भेजे गए हैं। उनमें बताया जा रहा है कि स्कूलों को अपने स्टाफ को तनख्वाह देने के लिए फंड की ज़रूरत है, इसलिए फीस जल्दी जमा करा दें, लेकिन आशीष की मौत इस बात की गवाह है कि स्कूलों द्वारा तनख्वाह दी जा रही है कि नहीं। आशीष का मामला कोई हाई प्रोफाईल नहीं है। इसलिए इस पर क्या और कैसी कार्रवाई होगी। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। स्कूलों के नाम पर आंदोलन चलाने वाले वह संगठन कहां हैं, जो अपने नारों से प्रशासन की नींव हिलाने का दावा करते दिखाई देते थे।

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