यूपी के मिर्जापुर में शिशु गृह बना कब्रगाह, एक साल में 6 बच्चों की मौत

मजिस्ट्रेटियल जांच के नाम पर की जा रही लीपापोती...

 

 

 

 

 

By: ज्योति मिनी

Published: 17 Mar 2018, 01:02 PM IST

Mirzapur, Uttar Pradesh, India

मिर्ज़ापुर. जिले में सरकारी सहायता से निजी संस्थाओं द्वारा संचालित शिशु गृह मासूम बच्चों के लिए कब्रगाह साबित हो रहे हैं। जिले में एक साल में 6 बच्चों की मौत हो गई है। सबसे शर्मनाक यह है कि, इन बच्चों की मौत के कारणों में लापरवाही और इलाज के अभाव की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, अभी इनकी पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही मासूमों के मौत के कारणों का पता चल पायेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के कार्यालय से महज चंद कदम दूर पर स्थित महादेव शिशु गृह में लावारिस हालात में मिले अनाथ बच्चों को रखा जाता था। मगर यहां एक साल के अंदर ही 6 बच्चों की मौत हो चुकी है। मौत की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।

मामले का खुलसा तब हुआ जब 10 जनवरी 2018 को शिशु गृह में दो महीने के आशीष नाम के बच्चे का मौत हो गई। जिसकी जानकारी संस्था ने जिला प्रोवेजनल अधिकारी डॉक्टर अमरेंद्र कुमार को पत्र द्वारा दी गयी। जानकारी पर जब अपनी टीम के साथ जांच करने शिशु गृह पहुंचे तो पूछताछ के दौरान मामले का खुलासा हुआ।

संस्था द्वारा दिये गए जनकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2017 से 1 फरवरी 2018 के अंदर कुल 6 बच्चों की मौत हो चुकी है। जिनमें से 1 मई 2017 को शाम्भवी, 2 जून2017 को मारिया, 6जून 2017 को हनी, 3अक्टूबर 2017 को परी, 7अक्टूबर2017 को शुभम और 10जनवरी 2018 को आशीष की मौत हो चुकी है। यह सभी बच्चे 6 वर्ष के भीतर के थे। मौत के इन मामलों पर संदेह होने पर जिला प्रोवेजनल अधिकारी ने जांच के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा। जिसपर मजिस्ट्रेट ने आदेश देते हुए जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौपा है। मौत की जांच चल रही है। मगर इससे पहले जांच के लिए भारत सरकार की तरफ से आई अधिकारी नंदिता मिश्रा ने संस्था की जांच किया।

शासन के निर्देश पर 22 फरवरी 2018 को शिशु गृह में मौजूद 9 बच्चों को राजकीय शिशु गृह लखनऊ भेज दिया गया। 24 फरवरी को संस्था को बंद करवा दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप मिश्र का कहना है कि, जांच चल रही है। जल्द ही इस पर रिपोर्ट दी जाएगी। वहीं पूरे मामले पर जिला प्रोवेजनल अधिकारी ने पत्रिका से बात करते हुए बताया कि, शिशु गृह में इस तरह से माशसूम बच्चो की मौत दुखद है, कार्रवाई की गई है जांच के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकता है।

रिपोर्ट आने पर उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि, केंद्रीय दत्‍तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के तहत सरकार जिलो में निजी स्वयंसेवी संस्थाओं से जिलो में शिशु गृह चलाया जाता है। जिनमें लावारिस हालात में मिले अनाथ 0 से 6 साल तक के बच्चों को रखा जाता है। इसके लिए संस्थाओं को कारा पैसे का भुगतान करती है। हर बच्चों के मौत पर संस्था द्वारा कारा की वेबसाइड पर कारणों सहित डालना पड़ता है। सवाल उठता है कि, लगातार बच्चों की मौत पर आखिर क्यों सरकारी अधिकारी सोते रहे।

by सुरेश सिंह

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