जिला अस्पताल में अब देना होगा भर्ती शुल्क, 17 साल पुराना आदेश लागू 

जिला अस्पताल में अब देना होगा भर्ती शुल्क, 17 साल पुराना आदेश लागू 
Mirzapur district Hospital

भाजपा सरकार बनते ही 17 साल पुराना शासनादेश हटा

मिर्जापुर. अब मिर्जापुर जिला अस्पताल में इलाज कराने आये वाले मरीजों को अलग से भर्ती शुल्क देना होगा। बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद 17 साल पुराने शासनादेश को फिर से लागू करने का निर्देश आया है। स्वास्थ्य विभाग ने सन 2000 में एक शासनादेश जारी किया था। जिसमे मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती के लिए 34 रूपये शुल्क देने का नियम था। मगर यह व्यवस्था कुछ दिनों तक चलने के बाद सपा सरकार आने के बाद मरीजों से भर्ती शुल्क लेना बंद हो गया था ।

अब भाजपा की सरकार बनने के बाद एक बार फिर से जिला अस्पताल ने इसी शासनादेश को आधार बना कर मरीजो पर 34 रूपये का भर्ती शुल्क 1 जुलाई से लागू कर दिया है। अस्पताल में लागू नई व्यवस्था मरीजो पर भारी पड़ रही है। अभी तक जिला  सरकारी अस्पताल में एक रूपये के पर्ची पर भर्ती होने वाले मरीजो को 1 जुलाई से अतिरिक्त भर्ती शुल्क 34 रूपये का भुगतान करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था के तहत सरकारी जिला अस्पताल में  प्राइवेट अस्पतालों की तरह भर्ती शुल्क तय कर दिया गया है।


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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और चिल्ड्रेन वार्ड के बाहर अस्पताल प्रशासन ने रेट लिस्ट की नोटिस लगा दिया है। रेट लिस्ट के अनुसार अस्पताल में भर्ती शुल्क 34 रूपये रखा गया है। प्राइवेट वार्ड में भर्ती शुल्क 100 रूपये है अगर प्राइवेट वार्ड में कूलर चाहिए तो उसका रेट 167 रूपये प्रतिदिन का है। वहीं हीटर के लिए 26 रूपया प्रतिदिन अलग से देना पड़ेगा।


जिला अस्पताल में व्यवस्था लागू होने के बाद मरीज परेशान हैं। वहीं मरीजों पर भर्ती शुल्क लगाने के फैसले पर जिला अस्पताल के सीएमएस ओ पी शाही का कहना है कि यह शुल्क 2000 में जारी शासनादेश के आधार पर ही मरीजों से लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के बाद सरकारी अस्पतालों में उन गरीब मरीजो की भी परेशानी बढ़ गयी है जो जिले के दूरदराज इलाकों से अपना इलाज कराने जिला अस्पताल में आते है। सवाल उठता है कि अगर 17 साल पहले कोई शासनादेश जारी किया गया था, तो उसे अब तक लागू क्यों नही किया गया, आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन है ।
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