भाजपा और सपा के बीच चुनार पुल को लेकर खिंची सियासी तलवार, दोनों दल आमने-सामने

भाजपा और सपा के बीच चुनार पुल को लेकर खिंची सियासी तलवार, दोनों दल आमने-सामने

Ashish Shukla | Publish: Jul, 13 2018 10:25:25 PM (IST) Mirzapur, Uttar Pradesh, India

कयास लगाया जा रहा था कि इस पुल का लोकार्पण जनपद में 15 जुलाई को पहुंच रहे पीएम के हाथों किया जायेगा

मिर्ज़ापुर. भाजपा और सपा के बीच इन दिनों चुनार पुल सियासी कुरुक्षेत्र का मैदान बना हुआ है। पुल बनवाने के श्रेय लेने कि होड़ ऐसी कि तय समय से पहले ही शुक्रवार को ही सपाइयों ने पुल पर पहुंचकर फीता काट उसका लोकार्पण कर दिया। अब सपा के इस कदम पर आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ता उनपर कार्रवाई की मांग कर रहे है। कयास लगाया जा रहा था कि इस पुल का लोकार्पण जनपद में 15 जुलाई को पहुंच रहे पीएम के हाथों किया जायेगा।

बतादें कि जिले के चुनार में गंगा नदी पर बने नव निर्मित पुल का लोकार्पण 15 जुलाई को जनपद में पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों किये जाने की पूरी संभावना थी। मगर इस बीच सपा नेताओं ने तेजी दिखाई और सपा जिलाध्यक्ष व चुनार से पूर्व विधायक जगतम्बा पटेल के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओ ने पुल पर पहुंचकर उसका लोकार्पण कर दिया। मगर इससे बौखलाए भाजपा कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए।

दर्जनो कि संख्या में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट को पत्रक दिया। सपा नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कि मांग किया। भाजपा युवा मोर्चा के नगर सह संयोजक दीपक और जिला सयोंजक मोंटी का कहना है कि सपा नेताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं चुनार पुल के सपा द्वारा लोकार्पण करने पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसे सपा कि हताशा का परिचायक बताया। उनका कहना था कि सर्व प्रथम भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री ओमप्रकाश ने पीपा पुल बनवाकर यहां की अति आवश्यक आवश्यकता की पूर्ति किया था। इसके बीसों वर्ष पश्चात मुलायम सिंह यादव जी तत्कालीन मुख्यमंत्री ने पक्के पुल की घोषणा की। परन्तु वह स्वयं व उनके पुत्र अखिलेश यादव अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में इस पुल को पूरा नही करा पाये।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि वास्तव में यह कार्य घोषणा तक ही सीमित था और सदैव सपा व बसपा के उपेक्षा का शिकार रहा। जिससे सपा बसपा के तीनो मुख्यमंत्री के कार्यकाल में यह कार्य पूर्ण नही हो पाया। परन्तु प्रदेश में भाजपा गठबन्धन सरकार आने के बाद पहले की भॉति इस घाट को भाजपा गठबन्धन ने शीर्ष प्राथमिकता पर लिया और जितना काम सपा व बसपा तीन सत्रो में नही किया वह कार्य हमारी गठबन्धन सरकार लगभग एक साल मे पूर्ण किया। पूरे मामले पर सबसे ज्यादा फजीहत पुलिस और खुफिया विभाग कि हुई उन्हें सपा नेताओं के इस कदम कि जानकारी ही नहीं मिल पाई।

उन्हें इसका पता तब चला जब सपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर लोकार्पण का वीडियो और फ़ोटो डाला। इसके बाद पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। पुलिस सिर्फ हाथ पाँव मारती रह गयी सपा नेता वहां से निकल लिए। पुलिस का कहना कि जाँच चल रही है। सेतु निगम से तहरीर मिलने का इंतजार है इसके बाद नियमानुसार करवाई कि जायेगे। फिलहाल तो सपा और भाजपा इस पुल को लेकर सियासी तलवार तन चुकी है।

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