Public Opinion: अनुप्रिया पटेल के गढ़ में बढ़े छेड़खानी के मामले, महिलाओं ने कहा सोच बदलने की जरूरत

सरकार बदलने के बाद भी जिले में महिलाएं हर जगह असुरक्षित हैं...

By: ज्योति मिनी

Updated: 04 Jan 2018, 02:36 PM IST

Mirzapur, Uttar Pradesh, India

सुरेश सिंह

मिर्ज़ापुर. सरकार बदलने के बाद भी जिले में महिलाएं हर जगह असुरक्षित हैं। हालांकि पुलिस महिलाओं से संबंधित अपराध के प्रति विशेष सतर्कता बरतने का दावा करती है। मगर अभी भी महिलाओं के प्रति अपराधों का सिलसिला थमा नहीं है। जिले के पिकनिक स्थलों पर खास तौर से लखनिया दरी में हाल ही में हुए विदेशी महिला पर्यटकों के साथ छेड़खानी और लालगंज में बीते दिनों एक लड़की के साथ दो लोगो द्वारा सामूहिक दुष्कर्म कि घटना खासी चर्चित रही।

कछवा इलाके में दूध देने गई महिला के साथ दुष्कर्म कि घटना भी सभी को झकझोर कर रख दिया। महिला और लड़कियों की मदद के लिए बनाए गए। जिले में एंटी रोमियो की टीम महज कागजों पर दिखाई देती है। हाल ही में माल के सामने विवाद में निलंबित कर दिए गए एंटी रोमियो प्रभारी अजय यादव के जाने के बाद किसी प्रभारी की नियुक्ति नहीं की गई। यह पद अभी भी खाली है।

वैसे यहां पर परिवार परामर्श केंद्र ने महिलाओं के प्रति अच्छा काम किया है। केंद्र के सदस्य सलिल पांडे के अनुसार अभी तक इस परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से एक हजार से अधिक महिलाओं को उनके परिवार से मिलाने का कार्य किया गया है। क्या कहती है जिले की महिलाएं। हालांकि प्रदेश के अन्य जिलों से मिर्ज़ापुर में महिला अपराध से जुड़ी आपराधिक घटनाएं कम ही होती है।

लिहाजा बढ़े आपराधिक घटनाओं के बाद भी यहां की महिलाओं को कुछ हद तक सुकून जरूर मिला है। महिलाओं से जुड़े अपराध और वह खुद को कितना सुरक्षित महसूस करती है। इस पर जब पत्रिका ने महिलाओं से सवाल किया, तो अमरावती स्थित ज्ञानंददा ला कॉलेज की डायरेक्टर शिला सिंह कहती हैं कि, अभी भी समाज को महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर और संवेदनशील होने की जरूरत है।

हालांकि पहले से परिवर्तन जरूर हुआ है पर ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी बेहतर कि जा सकती है। वहीं जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात सुनीता भी महिलाओं के प्रति बदले माहौल को स्वीकार करते हुए कहती हैं कि, उन्हें कभी भी खुद को असुरक्षित नहीं समझा। जबकि उनके साथ अधिकांश पुरुष कर्मचारी ही कार्य करते हैं।

जिले में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं जब इस पर पुलिस चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रही कक्षा 8 में पढ़ने वाली अन्नू सिंह से पत्रिका ने सवाल किया तो अन्नू का कहना था कि, अभी भी दस प्रतिशत और सुधार होने कि गुंजाइश है। लड़कियों को अब उसके परिवार वाले भरपूर सहयोग करते है। मैं यहां पर हूं इसी का नतीजा है।

वहीं इसी प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रही वैभवी गुप्ता और उनकी मां भी खुद को सुरक्षित महसूस करने की बात करती हैं। वैभवी की मां का कहना था कि, मोदी जी के आने के बाद महिलाओं से जुड़े अपराध में कमी जरूर आई है। महिलाओं के सुरक्षा के प्रति पुलिस मुस्तैद महिलाओं से संबंधित अपराध और उससे जुड़ी सुरक्षा के बारे में जब पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी से पत्रिका ने सवाल किया तो उन्होंने जिले में महिलाओं से जुड़े आपराधिक मामलों कि रोकधाम के लिए किए गए उपायों के बारे में बताते हुए कहा कि, पुलिस हेल्पलाइन 1090 के अलावा जिले में पुलिस की स्मार्ट एप्स भी बनाया गया है। जिसपर महिलाओं से जुड़े अपराध होने के बाद पीड़ित महिला पुलिसकर्मी की मदत से शिकायत दर्ज करा सकती है। उन पर तत्काल कदम उठाया जाता है।

राजनैतिक तौर पर महिलाओं को जिले ने दिया है। तरजीह फिलहाल कहा जाय तो जनपद में महिलाओ के प्रति अपराधों में कुछ इजाफा जरूर हुआ है मगर जिले कि महिलाएं उतनी असुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। वैसे भी राजनीतिक तौर पर जिला हमेशा ही महिलाओं के प्रति हमेशा ही सजग रहा है। कई महिला राजनीतिज्ञ ने जिले का प्रतिनिधित्व किया है। कभी फूलन देवी यहां से जीत कर सांसद बनी तो वर्तमान में अनुप्रिया पटेल संसद में जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वह मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी है। हाल ही में सम्पन्न हुए विधान सभा चुनाव में पांच विधान सभा एक सीट मझवां विधान सभा सीट से सुचिस्मिता मौर्या वर्तमान में विधायक हैं।

 

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