खदान मालिकों की चांदी, नक्सल क्षेत्र में बिन पानी सूनी हुई जिंदगानी

खदान मालिकों की चांदी, नक्सल क्षेत्र में बिन पानी सूनी हुई जिंदगानी
खदान मालिकों की चांदी, नक्सल क्षेत्र में बिन पानी सूनी हुई जिंदगानी

Ashish Kumar Shukla | Publish: Jun, 12 2019 10:09:40 PM (IST) Mirzapur, Mirzapur, Uttar Pradesh, India

पानी की कमी के चलते लोग दो-तीन दिन बगैर स्नान के रह रहे हैं

मिर्ज़ापुर. नक्सल क्षेत्र में पानी का संकट इस कदर गहराया हुआ है कि लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पीने के पानी के साथ ही लोगों को कपड़े धोने और नहाने के लिए भी पानी का इंतजाम करना किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है। आलम ये कई कि इलाके के लोगों के कई दिनों तक बिना नहाये गुजारा करना पड़ रहा है। जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। पानी के अभाव में तो लोग पशुओं को औने-पौने दाम में बेचकर मुक्ति पा रहे हैं ताकि उनके दरवाजे पर जानवर पानी के लिए न मरें और उनपर हत्या का पाप न लगे।

जी हां हम बात कर रहे हैं राजगढ़ इलाके कि यहां के दर्जनों गांव पानी के संकट से जूझ रहे हैं। ये संकट पैदा होने के सबसे बड़ा कारण क्रेशर प्लांट है। इस इलाके में खदान मालिकों ने चार क्रशर प्लांट लगाये हैं। खदान मालिक यहां से खनन के लिए ब्लास्टिंग का सहारा लेते हैं। ब्लास्ट होने से यहां की जमीन प्रभावित होती है। जिससे हैंडपंपों का बोर बैठ जा रहा है और पानी नहीं निकल रहा है। पानी न मिल पानी के लिए यहां के भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। लेकिन इस खनन को रोकने और लोगों की जिंदगी को सुरझित करने के लिए न ही प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही सरकार।

इलाके पर नजर डालें तो लाहौरा, गंगोदरा, पूरहनिया, ककरहिया और अतरी पुरवा की आबादी तकरीन 5 हजार से भी अधिक है। इस ग्राम सभा में पचासी सरकारी हैंडपंप लगाए गए हैं। वर्तमान समय की बात करें तो 70 हैंडपंप से बिल्कुल भा पानी नहीं आता। मदज 15 पंप से ही बहुत थोड़ा-थोड़ा पानी आता है जिससे लोग किसी तरह से अपना गुजर बसर कर रहे हैं। ये हैंडपंप की गांव के एक ही किनारे पर हैं जहां पर ब्लास्टिंग का असर कुछ है। इसलिए इसी ओर आकर ही पूरे गांव के लोगों को पानी ले जाना पड़ता है। जो कि तकरीबन दो किमी से भी अधिक हो जाता है।

पानी के अभाव में सूखे पड़े इज्जत घर

गांव के मंगरू यादव कहते हैं कि पानी की बड़ी समस्य़ा है। हम पशुओं को मुफ्त में दूर-दराज के लोगों को देने को मजबूर हैं। सरकार कहती है शौचालय बनवा, कहां से शौचालय बनायें जब पानी ही नहीं होगा तो शौचालय की उपयोगिता ही क्या होगी। आज हालत ये है कि यहां एक भी शौचालय किसी काम का नहीं रहा। इनका कहना है कि क्रशर प्लांट मालिकों ने अपनी कमाई के चक्कर में हमारी जिंदगी को बेपानी कर दिया।

टैंकर के पानी से पिएं या नहायें

अतरी पाल बस्ती में राम सूरत पाल , भोला पाल बिंद, पार्वती देवी, लालती देवी, राजाराम बिंद का कहना है कि प्रधान ने टैंकर के पानी का इंतजाम कराया है। वो दो-तीन दिन में पानी लेकर आता है। एक परिवार को एक-दो बाल्टी पानी ही मिल पाता है। इस पानी से हम खुद पीयें, नहायें या खाना बनायें, ऐसे हाल में गुजारा कर पानी बहुत मुश्किल हो रहा है। ग्राम प्रधान राकेश सिंह ने भी पत्रिका से बातचीत में कहा कि ये बिल्कुल सही है कि पानी की कमी के चलते लोग दो-तीन दिन बगैर स्नान के रह रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

क्रशर प्लांट लगने के कारण डीप ***** ब्लास्ट होने के सवाल पर डीएम यूपी सिंह ने कहा कि पहाड़ी इलाको में जो भी क्रसर प्लांट लगाये गये वो मानक के अनुरूप लगे हैं। जहां तक डीप ***** ब्लास्ट की बात है तो अभी ऐसा नहीं पाया गया है। अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी। पानी के संकट की बात आ रही है टैंकर से पानी सप्लाई कराई जा रही है। जो भी उचित होगा जनता को मुहैया कराया जाएगा।

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