BJP और अपना दल गठबंधन पर 2019 में कहीं भारी न पड़ जाय भाजपा की गुटबंदी

गुटों में बटी भाजपा को देख कर अनुप्रिया पटेल भी हमेशा दुविधा में रही कि कौन से गुट को साथ ले कर चलें।

सुरेश सिंह

मिर्ज़ापुर. लोक सभा चुनाव2019 का फाइनल शुरू होने में अब सिर्फ तीन से चार महीने का समय शेष है। इस लोक सभा चुनाव में सबसे बड़ा दांव सत्ताधारी भाजपा का लगा है। भाजपा एक बार फिर नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री पद के लिए पूरी ताकत लगाने की बात कह रही है। मगर जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही है। जिले में भाजपा नेताओं की गुटबंदी कही चुनाव में भारी न पड़ जाय। इसकी आशंका अधिक नजर आ रही है। आने वाले चुनाव में सहयोगी अपना दल (एस) को भारी न पड़ जाय। मिर्ज़ापुर संसदीय सीट 2014 में भाजपा और अपना दल गठबंधन में अपना दल के खाते में गयी थी।

 

यहां से खुद अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने चुनाव लड़ा और मोदी लहर में 2 लाख 50 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल कर सीट पर कब्जा किया। लेकिन इन साढ़े चार सालों में अपना दल (एस) और भाजपा एनडीए गठबंधन में साथी होने के बाद भी जिले स्तर पर दोनों दलों के कार्यकर्ता सहज नही हो पाये। जहां एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्री पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं जिले में गुटों में बटी भाजपा को देख कर अनुप्रिया पटेल भी हमेशा दुविधा में रही कि कौन से गुट को साथ ले कर चले। इसी उहापोह में अब पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के कगार पर है।

 

अब एक बार फिर 2019 के लिए अनुप्रिया पटेल मिर्ज़ापुर संसदीय सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उनके पास बताने के लिए विकास कार्यो की लंबी फेहरिस्त भी है। जिले में मेडिकल कालेज, वाराणसी से ड्रामलगंज और शीतला मंदिर से जिगना तक फोरलेन सड़क, पड़री में पूर्वांचल का सबसे बड़े पेट्रोलियम टर्मिनल बनवाने का काम सहित जनता के बीच ले जाने के लिए कई उपलब्धियां है। मगर उनके सामने भाजपा की गुटबंदी बड़ी मुसीबत के रूप में सामने है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा में इस समय तीन गुट एक दूसरे से गलाकाट प्रतिस्पर्धा कर रहे है। जहां एक तरफ मिर्ज़ापुर नगरपालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल और नगर से भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा के बीच विधान सभा चुनाव के बाद से ही रिश्ते सहज नही हो पाए।

 

दोनों नगर विधासभा क्षेत्र से विधान सभा चुनाव में टिकट के लिए दमदार प्रत्याशी थे मगर अंतिम समय मे मनोज जायसवाल रत्नाकर मिश्रा से पिछड़ गए और रत्नाकर मिश्रा को टिकट मिला वह विधायक हो गए। सम्भवतः टिकट हाथ से जाने की टीस आज भी उनके मन मे है। चुनावी क्षेत्र एक होने के कारण आये दिन दोनो के बीच एक दूसरे को राजनीति रूप से मात देने की कोसिस होती रहती है।खास बात तो यह है कि दोनों ही एक दूसरे की मौजूदगी में मंच साझा करने से बचते रहते है। वही भाजपा अध्यक्ष बालेंदुमणी त्रिपाठी और उनके समर्थक भी मनोज जायसवाल गुट से छत्तीस का आंकड़ा रहा है।वही पार्टी के चुनार विधायक अनुराग सिंह और भाजपा के दो विधायक मड़िहान से रामशंकर पटेल और मझवां से सुचिस्मिता मौर्या समय समय पर अपनी सुबिधा अनुसार दोनो गुटों में अपनी मौजूदगी दिखाते रहते है।

 

फिलहाल यह तय हो चुका है कि मिर्ज़ापुर संसदीय सीट अपना दल (एस) के खाते में जाएगी।अनुप्रिया पटेल का यहाँ से चुनाव लड़ना तय है।मगर आसंका जताई जा रही कि अगर समय रहते भाजपा का शिर्ष नेतृत्व अगर जिले की इस गुटबंदी पर काबू नही पा सका तो चुनाव में जहां अपना दल(एस) और भाजपा गठबंधन में रिश्ते पर असर पड़ेगा वही पार्टी को नुकसान भी हो सकता है।फिलहाल चुनाव होने में अभी चार महीने का समय शेष है देखने की बात होगी कि भाजपा इस गुटबंदी से पार पा कर 2014 का परिणाम दोहरा पाती या नही।

BJP
Show More
रफतउद्दीन फरीद
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned