सीएम योगी से नक्सल प्रभावित क्षेत्र की लड़कियों की गुहार

नक्सल प्रभावित इलाकों में रोजगार देने और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं

By: ज्योति मिनी

Published: 11 Sep 2017, 05:07 PM IST

मिर्जापुर. नक्सल प्रभावित इलाकों में रोजगार देने और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं। मगर नक्सल प्रभावित राजगढ़ में लड़कियों को सिलाई ,कढ़ाई, का प्रशिक्षण देने के लिए खुले ऐसे ही प्रशिक्षण केंद्र की हालत बदहाल हैं। हालत यह है कि यहाँ प्रशिक्षण ले रही लड़कियों को खुद इस सेंटर पर अपने पैसे से सुविधा करनी पड़ रही है।

 

राजगढ़ में पुलिस कम्युनिटी सेंटर के तहत यह केंद्र खोला गया है। नक्सल क्षेत्र राजगढ़ के पंचायत भवन में पुलिस कम्युनिटी सेंटर वर्ष 2010 11 में सिलाई कढाई बुनाई प्रशिक्षण केंद्र खोला गया था। उस समय के डीएम तत्कालीन राजेश कुमार सिंह ने इस प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया था 1 साल तक शासन द्वारा सहयोग किया। लेकिन इन सबके बीच में आज तक कोई भी अधिकारी प्रशासन इस कम्युनिटी सेंटर में झांकने तक नहीं आया है। नक्सल गांव की लड़कियों के लिए सुविधा किसी तरह से मुहैया ही पा रही है। हालात यह है कि साल भर बाद भी यहां पर आज तक कोई अधिकारी सेंटर को देखने तक नहीं आया। सेंटर पर लड़कियों को सिलाई कढ़ाई सीखा रहे प्रशिक्षक मोहम्मद शकील अहमद का कहना है कि किसी तरह जुगाड़ से लड़कियों को सिलाई कढ़ाई और बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।

 

 

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IMAGE CREDIT: patrika

प्रशासन का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। जिससे सिलाई मशीनों में तेल धागा और मशीन की बनाई का पूरा खर्च खुद वहन करना पड़ता है। हजारों लड़कियां यहां से सिलाई कढ़ाई सीख कर अपना काम कर रही हैं और यहां पर किसी भी लड़की को कोई भी सर्टिफिकेट शासन प्रशासन द्वारा आज तक नहीं मिला है। चार सिलाई मशीन खराब है इसको बनाने में काफी पैसा लग रहा है। वही सेंटर में प्रशिक्षण ले रही लड़कियों ने कहा कि, प्रशासन और शासन का सहयोग ना मिलने से हम लोगों में काफी निराशा है। कई बार अपने पैसे लगा कर इन सिलाई मशीनों को सही करा रहे हैं। हम गरीब लड़कियां कितना पैसा लगाएंगी। यहाँ सरकार द्वरा दी गयी सुविधा बहुत ही खराब हो चुकी है। किसी भी अधिकारी का सहयोग ना मिलने से मशीनों में जंग लग जा रही हैं। इस समय सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र में 160 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं। लेकिन सिलाई मशीन खराब होने से मात्र 25 से 30 लड़कियां ही सिलाई सीख रही हैं।

 

 

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बाकी लड़कियां इनके सीखने के बाद प्रशिक्षण लेगी। वहीं बदहाल हो चुके इस केंद्र का हाल बताते हुए मोहम्मद शकील अहमद ने कहा कि, 7 महीने से वेतन रुका हुआ है। किसी तरह से जुगाड़ कर के काम कराया जा रहा है।यहां की लड़कियां भी सहयोग करती हैं। ऐसा प्रशिक्षक केंद्र खुलवाने से क्या फायदा है जब स्थानीय प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है और अपने पैसे से ही सारा काम हो रहा है। सरकार ने नक्सल गांव के लिए प्रशिक्षण केंद्र इसलिए खुलवाया था कि यहां की लड़कियां सिलाई कढ़ाई सिखकर खुद स्वावलंबी बनें और दूसरों की मदद करें लेकिन सब हवा हवाई साबित हो गया है।

नई सरकार बनने के बाद भी नक्सल प्रभावित इस इलाके में स्थिति आज भी नहीं बदली है। मगर लड़कियों को उम्मीद है कि सीएम उनकी दर्द को समझते हुए इस केंद्र के लिए कुछ करेंगे।

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