महागठबंधन में UP की इस सीट पर फंसा पेंच, बसपा के बाद इस पार्टी ने भी ठोका दावा

आपस में ही उलझा गठबंधन तो बीजेपी को मिलेगा वाकओवर।

यशोदा श्रीवास्तव

महराजगंज. संसदीय चुनाव की बिसात पर अभी भाजपा आगे है। शहरों के नाम बदलकर और राम मंदिर के नाम पर साधू संतों को आगे कर एक तरह से उसने लोकसभा चुनाव का बिगुल यूपी में फूंक दिया है वहीं गैर भाजपा दल अभी गठबंधन को लेकर उलझे हुए हैं। गठबंधन की धुंधुली तस्वीर भी भाजपा के लिए फायदे मंद है क्योंकि अब तो मतदाता बालने लगा है कि जब ये अभी तक एक मत ही नहीं हुए तो भाजपा को हराएंगे क्या?

 

यूपी में गठबंधन की तस्वीर सचमुच ऐसी ही है कि मतदाता असमंजस में है। लोकसभा चुनाव के लिए टिकट के दावेदारों की लगे बड़े बड़े होर्डिंग्स भी मतदताओं को भ्रमित कर रहे हैं। बात डुमरियागंज संसदीय सीट करते हैं। पूर्व कांगे्रस सांसद जगदंबिका पाल यहां से भाजपा सांसद हैं। पाल को घेरने की कोशिश जहां एक ओर अपने ही दल के लोग कर रहे हैं वहीं विपक्ष भी घेरेबंदी में लगा हुआ है। अपना दल भी इस संसदीय सीट से टिकट की दावेदारी कर रहा है। पार्टी के युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत चैधरी अपना दल से टिकट के प्रबल दावेदार हैं।

 

पहली बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ अपना दल ने शोहरतगढ़ क्षेत्र से चुनाव लड़ा और उसे वजिय हासिल हुई। जाहिर है इससे पार्टी का मनोबल बढ़ा तो पांव पसारने की इच्छा भी जागृत हुई। खैर यह तो भाजपा और उसके सहयोगी दल के आपस की बात है। भाजपा और उसके गठबंधन को लोकसभा चुनाव में पराजित करने का ख्वाब पाल रहे विपक्षी दलों का क्या होगा जो अभी अलग अलग डाल पर बैठकर अपनी डफली अपना राग अलाप रहे हैं।

 

गठबंधन में फिलहाल अभी कांगे्रस का नाम नहीं है लेकिन सपा बसपा पीसपार्टी, निषाद पार्टी सहित कई अन्य पार्टियां तो हैं ही। लोकसभा चुनाव में गठबंधन में शामिल कई पार्टियां भाग्य आजमाना चाह रही हैं। डुमरियागंज संसदीय सीट मुस्लिम बाहुल्य सीट माना जाता है। इसलिए भाजपा को छोड़ अन्य पार्टियां इस सीट से मुस्लिम म्मीदवार ही उतारना चाहते हैं। मुस्लिम वोटों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की ललक ऐसी होती कि दूर दराज के मुस्लिम नेता भी यहां चुनाव लड़ने चले आते। कभी मीडिया सुंदरी रहीं सीमा मुस्तफा भी 1989 में यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं। मोहिसना किदवई भी कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से भाग्य आजमा चुकी हैं।

 

केडी मालवीय तो इस सीट से कांगे्रस के टिकट पर एमपी चुने ही जाते रहे। अब बाहर के दो मुस्लिम चेहरों से फिर यह क्षेत्र गुंजायमान हो रहा है। इनके चेहरों वाले होर्डिग्स और बेनरों से संसदीय क्षेत्र पट गया है। ये चेहरे हैं आफताब आलम और खलीलाबाद कं पूर्व विधायक तथा पीस पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष मो अयूब के। आफताब आलम जहां सपा बसपा गठबंधन के प्रबल दावेदार के रूप में मैदान में आ गए हैं तो डा अयूब भी सपा के साठ गठबंधन में स्वयं को दावेदार मान रहे हैं। गोरखपुर संसदीय उपचुनाव में पीसपार्टी भी सपा बसपा के साथ गठबंधन का हिस्सा थी। वहीं सपा के वरिष्ठ नेता व विधानसभा के पूर्व स्पीकर माता प्रसाद पांडेय भी लोकसभा का चुनाव फिर लड़ना चाहते हैं। उन्हें भरोसा है कि गठबंधन ने यदि उन्हें अवसर दिया तो वे चुनाव जीत सकते हैं।

 

बसपा के आफताब आलम 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर जिले के पिपराइच विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वे गोरखपुर के ही हैं। वहीं डा अयुब भी गारेखपुर जिले के बड़हलगंज के निवासी हैं। इनका यहां बड़ा नर्सिंगहोम है। डाक्टरी सेवा के रास्ते ही इन्होंने पीसपार्टी का गठन किया और कूद पड़े चुनाव मैदान में। 2012 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी के चार विधायक थे जिनमें एक सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज विधानसभा सीट भी पीासपार्टी के हिस्से में रही।

 

जिले के बढ़नी कसबे में डा अयूब अपने नर्सिंग होम की शाखा खोलकर वे डाक्टरी के जरिए जिले की राजनीति में पांव पसारना शुरू कर ही दिए हैं, लोकसभा चुनाव लड़ने की ख्वाहिश के तहत संसदीय क्षेत्र में बड़े बड़े होर्डिंग्स के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कर रहे हैं। इस संसदीय क्षेत्र से फिल हाल अभी तीन मुस्लिम चेहरे नजर आ रहे हैं। इनमें कांगे्रस के मो मुकीम,बसपा से आफताब आलम तथा पीस पार्टी से डा अयूब! गठबंधन होता है तो इस तीन चेहरे में से किसी एक को ही टिकट मिलेगा। मुस्लिम चेहरे के रूप में यदि एक चेहरा होगा तभी वह भाजपा को टक्कर दे सकता है यदि ये तीनों चेहरे सामने आए तो यह भाजपा के लिए वाकओवर होगा।

BJP
Show More
रफतउद्दीन फरीद
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned