मिर्जापुर में सड़क पर पढ़ाई करते हैं प्राइमरी स्कूली बच्चे, गाड़ी आती है तो मैडम करवाती हैं साइड

एक ऐसी पाठशाला जिसकी क्लास सड़क पर चलती है...

By: ज्योति मिनी

Published: 20 Dec 2017, 05:26 PM IST

Mirzapur, Uttar Pradesh, India

मिर्ज़ापुर. देश के भविष्य को सड़कों पर पढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार भले ही व्यवस्था के नाम पर स्कूलों में बच्चों को स्वेटर दे रही हो, मगर आज भी कई स्कूल सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। इन्ही सरकारी स्कूलों में नौनिहालों को सडकों पर बैठकर आने वाले भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। मिर्ज़ापुर शहर के मध्य रामबाग में स्थित वैरिस्टर यूसुफ बेसिक प्राइमरी पाठशाला में इन दिनों अध्यापक बच्चों को सड़कों पर बैठा कर पढ़ाने को मजबूर हैं।

एक कमरे में चल रहे इस प्राईमरी स्कूल में इस समय कुल 70 बच्चे पढ़ रहे हैं। इसी कमरे में स्कूल का समान रखा हुआ है। थोड़ी ही जगह में बच्चे बैठ कर पढ़ते हैं। कमरे में बच्चों के बैठने में हो रही दिक्कत कि वजह से आधे से अधिक बच्चों को सड़क पर बैठा दिया जाता है। स्कूल के अध्यापक ब्लैक बोर्ड को सड़क पर ही लगा कर बच्चों को पढ़ाते हैं।

जगह कि कमी के कारण बच्चों के लिए बनने वाले मिडडे मील भोजन भी स्कूल कि रसोइया हीरावती और चंदा मिल कर सड़क पर बनाती है। बच्चों को खाना खाने के बाद सड़क को साफ करती है। इसके बाद बच्चों कि पढ़ाई शुरू होती है।तो स्कूल खत्म होने तक दोनों दाईं सड़क के किनारे बैठ कर पढ़ रहे बच्चों कि सुरक्षा करती है।

इस स्कूल में 2011 से पढ़ा रही महिला अध्यापिका आयशा का कहना है कि, जब सड़क पर कोई गाड़ी आती है। तो स्कूल कि दाई और वह मिल कर बच्चों को हटा देती हैं। बच्चों को उठा देती हैं और गाड़ी गुजरने के बाद दुबारा बच्चे वंही बैठ कर पढ़ना शुरू कर देते हैं। आयशा के अनुसार उनकी मजबूरी है कि, बारिश के मौसम या फिर कोहरे में स्कूल को बंद कर दिया जाता है। दरसल, इन मौसमो में सड़क पर बैठ कर बच्चों को पढ़ाने में परेशानी आती है।

2015 में अमीना खातून के रिटायरमेंट के बाद आयशा इकलौती स्कूल में पढ़ाने वाली अध्यापिका है। जो रोज कुल 40 से 50 बच्चों को अकेले ही पढ़ाती हैं। हालाकि बच्चों के पढ़ाई से ज्यादा बच्चों कि सुरक्षा कि फिक्र उन्हें हमेशा लगी रही है। समस्या के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों से शिकायत कि गई मगर अधिकारी मौके पर आते हैं और देख कर चले जाते हैं।

हालांकि जिला बेसिक अधिकारी प्रवीण तिवारी इन बातों से इनकार करते हुए कहते हैं। वह इस समस्या के समाधान के लिए नगरपालिका अध्यक्ष से मिल चुके हैं। अगर नगरपालिका जमीन देने को तैयार होती है, तो स्कूल बनवा कर वहीं में चलाया जाएगा। फिलहाल देखना होगा कि, दशकों से चली आ रही बच्चों की इस समस्या का समाधन आने वाले समय में होता है या फिर नहीं।

input- सुरेश सिंह

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