पाकिस्तानी जेल से 11 साल बाद लाैटे पुनवासी की उजड़ चुकी है दुनिया, पत्नी भी हुई परायी, अब सिर्फ बहन का सहारा

  • पुनवासी की बहन ने बताया कि शादी के बाद पत्नी को विदा कर लाने की जिद में छोड़ा था घर
  • अटारी बार्डर से पुनवासी को लेकर लौटे बहन-बहनोई तो मिर्जाुपर में फूल मालाओं से हुआ स्वागत

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मिर्जापुर. मानसिक रुप से अस्वस्थ्य होने के चलते भटककर पाकिस्तान पहुंचे मिर्जापुर के पुनवासी की 11 साल पाकिस्तान में जेल (Punwasi Return from Pakistan Jail) काटने के बाद आखिरकार वतन वापसी हुई। लेकिन इन 11 सालों में पुनवासी की दुनिया पूरी तरह से उजड़ चुकी है। जिस पत्नी का गवना न होने के चलते वह नाराज होकर घर छोड़कर चला गया और पाकिस्तान (Pakistan) जा पहुंचा, वह पत्नी भी दूसरे की हो चुकी है। छह भाइयों में वह अकेला बचा है और परिवार के नाम पर सिर्फ बहन और बहनोई हैं। उसकी मानसिक स्थिति भी ऐसी नहीं कि अकेले गुजारा कर सके। हालांकि भाई के मिलने की आस छोड़ चुकी बहन उसे दोबारा पाकर खुश है और उसका कहना है कि वह अपने भाई को अपने पास रखेगी। भाई की आगे की जिंदगी अब उसकी जिम्मेदारी है। भाई को अटारी बाॅर्डर से लाने के लिये अपने पति और जिला प्रशासन द्वारा मुहैया कराए गए सिपाही के साथ उसकी बहन खुद गई थी। पुनवासी के लौटने पर बहन ने सरकार और जिला प्रशासन व मीडिया को धन्यवाद दिया है।

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मिर्जापुर (Mirzapur) के सिटी ब्लाॅक अंतर्गत भरुहना गांव का रहने वाला पुनवासी पुत्र कन्हैया लाल 9 मई 2009 को लापता हो गया था। उसकी बहन किरन ने बताया कि उसने अपने भाई पुनवासी की शादी कराई, जिसके बाद वह पत्नी का गवना कराने को कहने लगा। गवना की जिद पकड़े वह घर से निकला और लापता हो गया। तब काफी ढूंढने पर भी वह नहीं मिला। मानसिक रूप से अस्वस्थ (Mentally Disturbed) होने के चलते पुनवासी भटककर ट्रेन से जोधपुर चला गया और वहां से बाॅर्डर पारकर पाकिस्तान जा पहुंचा, जहां उसे पकड़कर जेल में बंद कर दिया गया।

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लापता होने के एक साल बाद उसकी पत्नी की भी दूसरी शादी हो गई। मानसिक अस्वस्थ्ता और घर का पता न चलने की वजह से उसकी वतन वापसी मुश्किल थी। पांच साल पहले वाराणसी के जिलाधिकारी को भारत सरकार की ओर से एक पत्र आया जिसमें वाराणसी से 40 किलोमीटर दूर क्षेत्र में उसके घर का पता लगाने को कहा गया। पता अस्पष्ट होने के चलते जानकारी मिल पाना मुश्किल था। 6 फरवरी 2019 को एक बार फिर डीएम वाराणसी को पुनवासी की नागरिकता की छानबीन के लिये शासन की ऐर से पत्र मिला। इस बार वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर, सहारनपुर और हापुड़ के डीएम को भी ऐसा ही पत्र मिला। एक बार फिर से पुनवासी के घर की तलाश शुरू हुई।

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काफी प्रयास के बाद आखिरकार मिर्जापुर एलआईयू ने एक अक्टूबर 2020 को सिटी ब्लाॅक के भरुहना में पुनवासी का घर और उसकी बहन को ढूंढ निकाला। इसके बाद पाकिस्तान से उसकी वतन वापसी के लिये सरकार को पत्र भेजा गया। परिवार वालों की प्रार्थना, स्थानीय प्रशसन और भारत सरकार के की कोशिशें रंग लाईंं। 17 नवंबर 2020 को पाकिस्तान ने पुनवासी को पंजाब के अटारी बाॅर्डर पर बीएसएफ को सौंप दिया। वहां 14 दिन क्वारंटीन पीरियड बीतने के बाद मिर्जापुर प्रशासन और उसके परिवार को खबर दी गई। जिला प्रशासन ने एक सिपाही के साथ उसकी बहन और बहनोई को पुनवासी को लाने के लिये अटारी बाॅर्डर (Atari Border) भेजा। उसे लेकर वो लोग बेगमपुरा एक्सप्रेस से वाराणसी पहुंचे और वहां से उसे घर लाया गया।

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प्रशासन ने पुनवासी के पुनर्वास का वादा किया है। प्रभारी जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा है कि पुनवासी की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिये रोजगार, आवास, खेती या पशुपालन आदि किसी तरह का रोजगार करने के काम में मदद की जाएगी। उनके पुनर्वास में उनकी पूरी सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुनवासी की वतन वापसी से पूरा जिला खुश है।

By Suresh Singh

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रफतउद्दीन फरीद
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