समाजवादी पार्टी को मिली बड़ी खुशी, फेल कर दिया विपक्ष का समीकरण अखिलेश यादव जिंदाबाद के लगे नारे

समाजवादी पार्टी को मिली बड़ी खुशी, फेल कर दिया विपक्ष का समीकरण अखिलेश यादव जिंदाबाद के लगे नारे

Ashish Kumar Shukla | Publish: May, 18 2018 10:28:31 AM (IST) Mirzapur, Uttar Pradesh, India

सपा की इस सफलता से पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी और जोश देखा जा रहा है

मिर्जापुर. मझवां ब्लाक पर सपा की ब्लाक प्रमुख संध्या गुप्ता ने अपनी रणनीतिक बाजीगरी से विपक्षी खेमे में लामबंद नहीं होने दिया और विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया। साथ ही सपा की नेता अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रही। सपा की इस सफलता से पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी और जोश देखा जा रहा है।

बतादें कि मझवां ब्लाक प्रमुख संध्या गुप्ता के खिलाफ विपक्ष लामबंद होकर अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी कर रहा था। इसके लिए डीएम से मुलाकात कर अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए समय की मांग किया गय़ा। गुरूवार की सुबह 11 बजे से दो बजे के बीच में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए सदस्यों को सभागार में पहुंचना था। लेकिन दोपहर एक बजे तक अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में महज ग्यारह क्षेत्र पंचायत सदस्य ही पहुंच सके।

इतना ही नहीं आखिरी के एक घंटे में भी विपक्ष ने अपनी ताकत तो दिखाई लेकिन संख्या में कुछ खास इजाफा न हो सका। आखिरी समय तक कुल 22 महिला और पुरूष क्षेत्र पंचायत सदस्य ही सभागार में उपस्थित हो पाये। जबकी मझवां ब्लाक क्षेत्र में 76 सदस्य हैं और अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिये विपक्षियों को कम से कम 39 सदस्य को लाना था। जिससे सपा ब्लाक प्रमुख की कुर्सी बच गई।
चुनाव के नामित अधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने जैसे ही सपा ब्लाक संध्या गुप्ता की कुर्सी बरकरार होने की घोषणा की सपाईयों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। ब्लाक परिसर के बाहर समाजवादी पार्टी के नेताओं का जमावड़ा लग गया। देखते ही देखते भारी तादात मे कार्यकर्ता सपा के झंडे लिए पहुंच गये। सपा और अखिलेश के नारे लगने लगे। सभी ने एक दूसरे को मिठाईयां खिलाकर जमकर खुशी मनाई।
विपक्ष पर भारी पड़ी सपा की एकता

बतादें कि सपाईयों की ये कुर्सी बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई तो वो है सपा की एकता। सपा के छोटे-बड़े नेकाओं ने विपक्ष को घेरने का काम और उसे तोड़ने का भी काम किया। बीडीसी सदस्यों को मतदान के लिए न पहुंचने के लिए हर तरीके से उन्हे भरोसे में लिया गया। जिसका असर ये रहा है 76 सदस्यों में सिर्फ 22 ही मतदान करने पहुंचे और सपा ने अपनी सत्ता बरकरार रखी।

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