विंध्याचल मंदिर में चढ़े फूल से बनाई जा रही अगरबती, महिलाओं को मिल रहा रोजगार

महिलाओं के प्रयास से यह अगरबत्ती विन्ध्याचल क्षेत्र के अष्टभुजा, विंध्याचल और कालीखोह मंदिर स्थानीय बाजारों के दुकानों पर खूब बिक रहे हैं।

मिर्जापुर. जनपद में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के समूह ने अच्छी पहल करते हुए विंध्यवासिनी के धाम में प्रतिदिन चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती बना रही हैं। यह फूल पहले गंगा नदी में बहाया जाता था। मगर महिलाओं के दिल में ऐसी प्रेरणा जगी की, जिससे एक तरफ जहां नदी प्रदूषण मुक्त हुआ और वही मंदिर में चढ़ाया गया फूल इन महिलाओं के कमाई का माध्यम बन गया है।


करोड़ों के आस्था का केंद्र विंध्यवासिनी मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में दूर-दूर से भक्त आते हैं। नवरात्रि में इनकी संख्या कई लाख पहुंच जाती है। मंदिर में दर्शन पूजन के लिए पहुचने वाले भक्त माला फूल चढ़ाते है। आस्था के इस प्रतीक मालाफूल को पहले गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था। मगर अब यह फूल गंगा नदी में प्रवाहित नहीं किया जाता मंदिर में समूह की महिलाएं दिन में दो बार पहुंचकर इन्हें लेकर अपने घर जाती हैं । इन्हें चुनकर सुखाती हैं। इनके चूर्ण का प्रयोग वह अगरबत्ती में करती हैं। इस काम में लगी महिलाओं को एक तरफ रोजगार मिला तो वहीं उनकी आमदनी भी बढ़ गई है।


महिलाओं के प्रयास से यह अगरबत्ती विन्ध्याचल क्षेत्र के अष्टभुजा, विंध्याचल और कालीखोह मंदिर स्थानीय बाजारों के दुकानों पर खूब बिक रहे हैं। समूह से जुड़ी निशा का कहना है कि फूलों के द्वारा उन्हें चार पैसे की आमदनी हो जाती है। वहीं गीता और मनराजी देवी का कहना ह ।कि पहले परिवार चलाने में दिक्कत होती थी, मगर अब इसे मिले पैसे से नून, रोटी व तेल का व्यवस्था हो जा रहा है। वहीं सीडीओ प्रियंका निरंजन ने भी इन महिला समूह की तारीफ करते हुए कहा कि खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संपर्क करके इनके उत्पाद की बिक्री बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि हम हर संभव सहायता दे रहे है।

BY- SURESH SINGH

Akhilesh Tripathi
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