
वायुसेना के विमान AN-32 में सवार सभी वायु सैनिक शहीद, सुबह पहुंची सर्च टीम ने की पुष्टि
नई दिल्ली। वायुसेना के लापता विमान AN-32 को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। इस विमान का ब्लैक बॉक्स अब सर्च टीम को मिल गया है। माना जा रहा है कि इस बॉक्स के मिलने के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले लंबे समय से लापता चल रहे इस विमान के सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम गुरुवार सुबह क्रैश साइट पर पहुंची। यहां पहुंचते ही सर्च टीम ने जो जानकारी भेजी उसके मुताबिक AN-32 विमान में सवार एक भी वायु सैनिक जीवित नहीं बचा।
इस बारे में वायुसेना ने विमान में सवार सभी 13 वायु सैनिकों के परिवारों को भी सूचना दे दी, जो पिछले कई दिनों से अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे थे। सेना ने सभी शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी है। आपको बात दें कि 3 जून को असम के जोरहाट से इस विमान ने उड़ान भरी और उड़ान के कुछ देर बाद ही यह विमान गायब हो गया।
ये काम करता है 'ब्लैक बॉक्स'
विमान AN-32 के ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद कई अहम जानकारियां हाथ लग सकती हैं। जैसे उस दौरान क्या हुआ?, विमान में मौजूद सदस्यों ने आखिरी बार कहां संपर्क किया? आदि। बहरहाल यहां ये जान लें कि आखिर ये ब्लैक बॉक्स काम क्या करता है। 'ब्लैक बॉक्स' वायुयान में उड़ान के दौरान विमान से जुड़ी सभी तरह की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने वाला उपकरण होता है। इसे या फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर भी कहा जाता है। आम तौर पर इस बॉक्स को सुरक्षा की दृष्टि से विमान के पिछले हिस्से में रखा जाता है।
ये बॉक्स टाइटेनियम का बना होता है और टाइटेनियम के ही बने डिब्बे में बंद होता है ताकि ऊंचाई से जमीन पर गिरने या समुद्री पानी में गिरने पर इसे कम से कम नुकसान हो।
iaf ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
इंडियन एयर फोर्स ने विमान AN-32 में सवार सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वायुसेना ने कहा कि दुख की इस घड़ी में सेना शहीदों के परिवारों के साथ खड़ी है।
इन्होंने गंवाई जान
11 जून को मिली पहली सफलता
विमान AN-32 के लापता होने के एक हफ्ते से भी ज्यादा समय के बाद11 जून को इसको लेकर पहली सफलता हाथ लगी। विमान के बार में अरुणाचल प्रदेश के टेटो इलाके के पास इस विमान का मलबा दिखाई दिया। तब से लेकर 13 जून गुरुवार सुबह तक इस विमान के मलबे तक पहुंचने की कोशिश वायुसेना की सर्च टीम की तरफ से की जा रही थी।
मौसम बना सबसे बड़ी बाधा
वायुसेना की माने तो विमान AN-32 का पता लगाने में सबसे बड़ी बाधा उनके सामने मौसम की रही। इसके चलते कई बार इस ऑपरेशन को बीच में या तो रोकना पड़ा या फिर आगे बढ़ाना पड़ा। मलबे की खबर मिलने के बाद भी क्रैश साइट तक पहुंचने में दो दिन का वक्त लगा। इसकी वजह भी खराब मौसम ही रहा।
पर्वतारोहियों को ऐसे क्रैश साइट तक पहुंचाया
लंबी जद्दोजहद के बाद 12 जून बुधवार को 15 पर्वतारोहियों को एमआई-17s और एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) से लिफ्ट करके मलबे वाली जगह के नजदीक पहुंचाया गया। इसके बाद शुरू हुई विमान में सवार यात्रियों को खोजने की मुहिम।
चीनी सीमा के पास आखिरी बार दिखा विमान
आपको बता दें कि जब 3 जून को विमान AN-32 ने उड़ान भरी थी तब आखिरी बार वो अरुणाचल के पश्चिम सियांग जिले में चीन की सीमा के पास देखा गया था। इसके बाद लगातार इस विमान को खोजने का काम जारी रहा। वायुसेना के कई विमानों के साथ-साथ इसरो की मदद भी विमान AN-32 को खोजने के लिए ली गई। आखिरकार ये एयररूट से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर टेटो इलाके में स्थित घने जंगलों में मिला।
Updated on:
13 Jun 2019 11:49 pm
Published on:
13 Jun 2019 01:51 pm

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