बिहार में 2 दर्जन विधायकों की संपत्ति में 200 फीसदी का इजाफा, जा सकती है सदस्यता

ashutosh tiwari

Publish: Oct, 12 2017 05:56:59 (IST)

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बिहार में 2 दर्जन विधायकों की संपत्ति में 200 फीसदी का इजाफा, जा सकती है सदस्यता

विधायकों की संपत्ति में 2010 और 2015 के बीच 200 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है।

पटना. बिहार के लगभग दो दर्जन माननीय विधायकों की संपत्ति में 2010 और 2015 के बीच 200 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। जब आयकर विभाग ने इन विधायकों से संपत्तियों के इजाफे का कारण पूछा तो वे इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अब इन विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ गई है। इस लिस्ट में सत्ताधारी जदयू और भाजपा सहित सभी दलों के विधायक शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इस संबंध में सभी जरूरी सूचनाएं आयकर विभाग को दे दी हैं। इसमें सबसे अहम चुनाव के पूर्व अपनी संपत्तियों की घोषणा का शपथ पत्र शामिल है। अब चुनाव आयोग को आयकर विभाग की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। इन विधायकों ने अपनी पहले की संपत्तियों को किसी कारण से उजागर नहीं किया था और अब उन्होंने इसका खुलासा किया है तो आयकर विभाग इस बात की जांच करेगा कि ये मामला किस तरह के अपराध की श्रेणी में आ रहा है। एक सामान्य नियम के मुताबिक विधायकों को छुपाई संपत्ति का 300 प्रतिशत तक जुर्माना भरना पड़ सकता है।

कई दंबगों के नाम शामिल
जिन विधायकों की संपत्तियों में इजाफा दर्ज किया गया है, उनमें नवादा से राजद विधायक राजबल्लभ प्रसाद, पते पुर से प्रेमा चौधरी, लालगंज से जदयू विधायक विजय कुमार शुक्ला, शरफुद्दीन, विजय कुमार सिन्हा, नीरज कुमार सिंह, अरुण कुमार और पूर्णिमा यादव शामिल हैं। मधुबन से भाजपा विधायक और मंत्री राणा रणधीर का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है।

देशभर में 36 सांसदों व 257 विधायकों की संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी
लोकप्रहरी (लखनऊ) नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि चुनाव नामाकंन के दौरान प्रत्याशी अपनी संपत्ति की जानकारी तो देते हैं, लेकिन उसका पता नहीं बताते। ऐसे में नामांकन पत्र में इसके लिए अलग से एक कॉलम होना चाहिए। लोक प्रहरी ने याचिका में दावा किया कि 26 लोकसभा सांसद, 11 राज्यसभा सांसद और 257 विधायकों की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इनमें कुछ की संपत्ति में 500 गुना की तक की बढ़ोतरी हुई।

 

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7 सासंद व 97 विधायकों की ब्योरे में गड़बड़ी: सीबीडीटी
11 सितंबर, 2017 को इसी याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने हलफनामे के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को बताया किदेश के 7 लोकसभा सांसदों और 98 विधायकों की संपत्ति मे अत्याधिक वृद्धि हुई है और उनके ब्योरे में गड़बडिय़ां पाई गईं हैं।

लेकिन नाम नहीं बता सकते...
सीबीडीटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इन राजनेताओं के नाम उजागर नहीं किए जा सकते। इसलिए वे इस मामले की सभी जानकारी सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को देंगे।

सुप्रीम कोर्ट हुआ बेहद सख्त तब सीबीडीटी ने दिया हलफनामा
सुनवाई के दौरान 6 सितंबर को जस्टिस जे चेलमेश्वर और एस अब्दुल नजीर की बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि सरकार कह तो रही है कि वह चुनाव सुधार के खिलाफ नहीं, लेकिन वह जरूरी जानकारी नहीं दे रही। यहां कि सीबीडीटी की ओर से दी गई जानकारी भी अधूरी है। क्या है भारत सरकार का रुख है? आपने अब तक किया क्या है? आवश्यक जानकारी बेंच के समक्ष होनी चाहिए। इसमें प्रत्याशियों के शपथपत्र के वेरीफिकेशन, उनकी जांच आदि के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। इसके बाद बेंच ने 12 सिंतबर तक इस बारे में विस्तृत हलफनामा देने का आदेश दिया।

ऐसे होता प्रत्याशियों की घोषणाओं का वेरिफिकेशन
सीबीडीटी और निर्वाचन आयोग के बीच प्रत्याशियों की ओर से दाखिल संपत्तियों के हलफनामे का इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत वेरिफिकेशन होता है। इसमें मुख्यतौर पर सीबीडीटी का जांच निदेशालय घोषित संपत्ति और आयकर रिटर्न से प्रति-परीक्षण करता है।

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