कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के आज 29 वर्ष पूरे, सरकार से की घाटी में अपने लिए अलग बस्ती बनाने की मांग

कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ सदस्य शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित महात्मा गांधी की समाधि (राजघाट) पर एकत्रित हुए और विस्थापन दिवस मनाया।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के 29 वर्ष पूरे हो गए। इस मौके पर कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ सदस्य शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित महात्मा गांधी की समाधि (राजघाट) पर एकत्रित हुए और विस्थापन दिवस मनाया। सभी ने सरकार से घाटी में अपने लिए एक अलग बस्ती बनाने की मांग की। राजघाट में सभी सदस्यों ने कश्मीर घाटी लौटने का संकल्प लिया और घर वापसी की सुविधा के लिए सरकार से अपना कर्तव्य पूरा करने की अपील की।

19 जनवरी 1990 की काली रात को क्या हुआ था कश्मीरी पंडितों के साथ

1990 में कश्मीर पंडित हुए थे विस्थापित

आपको बता दें कि 19 जनवरी 1990 में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसात्मक रूख अख्तियार कर लिया था। आतंकवादियों के साथ सैंकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए थे और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ नारेबाजी की और उन्हें परेशान किया गया। जिसके कारण कश्मीर पंडित अपने घर को छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो गए। उसके बाद से घाटी में लगातार यह दौर जारी रहा। एक बयान में कहा गया है कि 19 जनवरी 1990 से पहले और बाद में कई कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई, उन्हें प्रताड़ित किया गया और एक के बाद एक परिवारों को निशाना बनाया गया। इसलिए अपनी जान बचाने को लेकर घाटी से धीरे-धीरे सभी कश्मीरी पंडित पलायन कर गए।

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कश्मीरी पंडितो को लेकर सियासत

आपको बता दें कि कश्मीरी पंडितों को वापस घाटी में बसाने को लेकर लगातार सियासत होती रही है। मोदी सरकार ने 2014 में अपने चुनावी घोषणा में वादा किया था कि केंद्र में सरकार बनने पर कश्मीरी पंडितों को वापस बसाया जाएगा। लेकिन पांच वर्ष गुजर जाने के बाद भी घाटी में कश्मीरी पंडितों को बसाने का माहौल तक नहीं बन सका है। मोदी सरकार से पहले कांग्रेस की सरकारें रहीं। लेकिन फिर भी कश्मीरी पंडितों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं किया जा सके जिससे कि वे अपने घर को लौट सकें। कश्मीरी पंडितों को लेकर हमेशा से सियासत होती रही है। चाहे वह जम्मू-कश्मीर की सरकार हो या फिर केंद्र की सरकार।

 

 

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Anil Kumar
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