AICTE को मिला विकल्प, खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए कॉलेजों का किया जाएगा विलय!

इन कॉलेजों में साल दर साल दाखिलों की संख्या में आ रही है गिरावट, हर साल 150 कॉलेजों को बंद करता है AICTE

मुंबई: ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानि कि AICTE देश के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए 2 कॉलेजों का विलय करने पर विचार कर रही है। AICTE ने ये फैसला लगातार साल दर साल 30 फीसदी से भी कम सीटें भरने की वजह से लिया है। आपको बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि देश के करीब 800 कॉलेजों में दाखिले की कमी की वजह से इन कॉलेजों को बंद किया जाएगा, हालांकि दोनों विकल्पों पर अभी विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पूरे देश में करीब 800 इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं जिनमें साल दर साल दाखिलों में कमी आ रही है और कॉलेज में सीटें खाली रह जाती हैं। वहीं इसके अलावा इन कॉलेजों में हो रही दाखिलों की कमी को लेकर AICTE 2 कॉलेजों के विलय पर भी विचार कर रहा है, जो कि एक-दूसरे के आसपास होंगे।

AICTE के मानकों पर खरा नहीं उतर रहे हैं कॉलेज
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, इन कॉलेज की सीटों के लिए कोई दावेदार नहीं हैं और इन कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। यह जानकारी एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल दत्तात्रेय सहस्रबुद्धि ने दी है। आपको बता दें कि AICTE के सख्त नियमों के तहत हर साल करीब 150 कॉलेजों कों बंद किया जाता है। काउंसिल के एक नियम के मुताबिक, जिन कॉलेजों में उचित आधारभूत संरचना की कमी है और पांच साल से जहां 30 प्रतिशत से कम सीटों पर ही एडमिशन होते हैं, उन्हें बंद कर दिया जाता है। देश में पिछले 4 साल के अंदर 4,633 कोर्सेस और 527 संस्थानों को इसी वजह से बंद कर दिया गया है।

इन राज्यों के कॉलेजों होंगे बंद
जानकारी के मुताबिक, AICTE ने 2014-15 से 2017-18 तक पूरे भारत में 410 से अधिक कॉलेजों को बंद करने को मंजूरी दी है। इनमें से 20 संस्थान कर्नाटक में हैं। 2016-17 में सबसे ज्यादा संख्या में संस्थाओं को बंद करने की मंजूरी दी गई थी। तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा कॉलेज ऐसे हैं, जो एआईसीटीई के नियमों के हिसाब से बंद होने की कगार पर हैं।

कॉलेजों ने दिए थे 2 सुझाव
कॉलेजों के बंद होने की जानकारी देते हुए AICTE के अध्यक्ष अनिल दत्तात्रेय सहस्रबुद्धि ने कहा, ''कॉलेजों को बंद करने की खबर के बाद हमें 2 तरह के सुझाव मिले हैं, पहला तो ये कि पिछले 3 साल के नामांकन रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद फैसले को अगले 2 साल के लिए टाल देना है, इसके अलावा दूसरा सुझाव कॉलेजों ने ये दिया है कि बंद न करके या तो कॉलेजों का विलय किया जाए या फिर अन्य ट्रस्टों के द्वारा कॉलेजों की खरीददारी को मंजूरी दी जाए।

नए एडमिशन नहीं होंगे इन कॉलेजों में
आपको बता दें कि ऐसे कॉलेजों का प्रोगेसिव क्लोजर होगा। प्रोगेसिव क्लोजर होने का मतलब है कि संस्थान में एस एकेडमिक सेशन में फर्स्ट ईयर में किसी छात्र का एडमिशन नहीं होगा, हालांकि पहले से पढ़ रहे छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने का विकल्प दिया जाएगा। एआईसीटीई ने इंजिनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को भी अपने पाठ्यक्रम को संशोधित और नवीनीकृत करने की सलाह दी है, जो प्रवेश की संख्या में गिरावट और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट का प्रमुख कारण है।

Chandra Prakash Content Writing
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