गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा घटी, जानिए देश में दिए जाने वाले सारे सिक्योरिटी कवर

  • देश में प्रमुख रूप से चार स्तर की सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाती है।
  • एसपीजी सिक्योरिटी कवर काफी क्लासीफाइड है।
  • जेड प्लस सिक्योरिटी सबसे ऊंचे स्तर का सिक्योरिटी कवर है।

नई दिल्ली। ताजा खबर है कि मोदी सरकार गांधी परिवार की सुरक्षा घटाने जा रही है। सूत्रों की मानें तो सोनिया, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को फिलहाल मुहैया कराई गई एसपीजी सुरक्षा हटाई जाएगी और जेड प्लस सिक्योरिटी दी जाएगी। अब जब एसपीजी, जेड प्लस सिक्योरिटी की बात आ ही गई है, तो यहां यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि देश में कितनी तरह की सिक्योरिटी दी जाती है।

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सबसे पहले यह बताना जरूरी है कि देश के किसी व्यक्ति को सुरक्षा क्यों दी जाती है। दरअसल किसी व्यक्ति के ऊपर जितना गंभीर खतरा मंडरा रहा होता है, उसे उतने ही ऊंचे स्तर की सुरक्षा दी जाती है।

आमतौर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, नौकरशाहों, पूर्व नौकरशाहों, न्यायधीशों, पूर्व न्यायधीशों, व्यापारियों, क्रिकेटरों, फिल्म सितारों, साधुओं को विभिन्न स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाती है। फिलहाल देश में प्रमुख रूप से चार प्रकार की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है।

देश में सबसे हाई सिक्योरिटी एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप कवर के रूप में प्रदान की जाती है। हालांकि यह क्लासीफाइड होती है और सुरक्षा स्तर में यह शामिल नहीं होती। इसे प्रधानमंत्री और उनके परिवार, पूर्व प्रधानमंत्रियों व उनके परिवारों को दिया जाता है।

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इसमें कितने स्तर की और कितने व्यक्तियों की सिक्योरिटी होती है, यह जानकारी क्लासीफाइड होती है और नहीं बताई जाती। एसपीजी में काफी ज्यादा प्रशिक्षित ऊंचे दर्जे वाले सुरक्षा बल के जवानों के साथ पैरामिलिट्री फोर्सेज के सदस्य भी होते हैं।

सिक्योरिटी कवर की कैटेगरी

Z+ कैटेगरी (सबसे ऊंचे दर्जे की सुरक्षा)

  • इसके अंतर्गत 55 कर्मचारी आते हैं। इनमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो, पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।
  • हर कमांडो मार्शल आर्ट्स और निहत्थे लड़ाई में महारथी होता है।
  • जेड प्लस सिक्योरिटी में एनएसजी कमांडो के पास काफी शानदार MP5 बंदूकें और अत्याधुनिक कम्यूनिकेशन गैजेट्स होते हैं।
  • देश में 12-17 वीआईपी को जेड प्लस सिक्योरिटी दी गई है।

Z कैटेगरी

  • यह दूसरे स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है।
  • इसमें 22 लोगों की सुरक्षा दी जाती है, जिनमें 4-5 एनएसजी कमांडो-पुलिसकर्मी होते हैं।
  • इसे दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ जवान मुहैया कराते हैं और इसके साथ एक एस्कॉर्ट कार भी होती है।

Y कैटेगरी

  • यह तीसरे स्तर की सुरक्षा है।
  • इसमें 11 लोगों का सिक्योरिटी कवर दिया जाता है, जिनमें 1-2 कमांडो-पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।
  • इसके अंतर्गत दो निजी सिक्योरिटी ऑफिसर्स भी दिए जाते हैं।

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X कैटेगरी

  • यह सिक्योरिटी का चौथा स्तर है।
  • इसके अंतर्गत दो कर्मियों की सुरक्षा दी जाती है।
  • इनमें कोई कमांडो नहीं होता और केवल हथियारबंद पुलिसकर्मी होते हैं।
  • इसमें एक निजी सुरक्षा अधिकारी दिया जाता है।

इनके हाथ होती है सुरक्षा की जिम्मेदारी

  • देश में वीवीआईपी, वीआईपी आदि को दी जाने वाली विभिन्न स्तर की सुरक्षा की जिम्मेदारी अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के हाथ में होती है।
  • इनमें एसपीजी, एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स), आईटीबीपी (इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) और सीआरपीएफ (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) के जवान शामिल होते हैं।
  • कुछ मामलों में सीआईएसएफ (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) के जवानों को भी तैनात किया जाता है।

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कैसे तय होता है सिक्योरिटी कवर

  • अगर किसी वीआईपी को जान का खतरा होता है तो यह सरकार की जिम्मेदारी होती है कि उसे सुरक्षा प्रदान की जाए।
  • जिस व्यक्ति को जान का खतरा होता है वह अपने घर के नजदीकी पुलिस थाने में प्रार्थना पत्र देता है।
  • इसके बाद इस मामले को खुफिया एजेंसियों को भेज दिया जाता है, ताकि वह पता करें कि संबंधित व्यक्ति पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
  • जब खतरा सुनिश्चित हो जाता है, तब गृह सचिव, महानिदेशक और राज्य के मुख्य सचिव की एक समिति यह तय करती है कि उस व्यक्ति को किस स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाए।
  • इसके बाद गृह मंत्रालय को औपचारिक स्वीकृति के लिए सारी जानकारी भेजी जाती है।

अपवाद

  • वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सुरक्षा कर्मियों ने कर दी थी।
  • मार्च 2008 में मशहूर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या जेड प्लस सिक्योरिटी के बावजूद कर दी गई।
  • सिक्योरिटी मिली होने के बावजूद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन की हत्या उनके भाई ने कर दी थी।

(उपरोक्त जानकारी विभिन्न स्रोतों-सुरक्षा अधिकारियों से मिले इनपुट के आधार पर।)

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अमित कुमार बाजपेयी
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