अनुच्छेद 35A की चुनौतीपूर्ण याचिकाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील, सुनवाई टालने की मांग

अनुच्छेद 35A की चुनौतीपूर्ण याचिकाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट  में  अपील, सुनवाई टालने की मांग

Shiwani Singh | Publish: Feb, 11 2019 06:45:37 PM (IST) | Updated: Feb, 11 2019 07:43:25 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

जम्मू एवं कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 35A पर चल रही चुनौतीपूर्ण याचिकाओं के खिलाफ जम्मू कश्मीर ने सुप्रीमकोर्ट में अपील दायर की है।

नई दिल्ली - जम्मू एवं कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 35A पर चल रही चुनौतीपूर्ण याचिकाओं के खिलाफ जम्मू कश्मीर ने सुप्रीमकोर्ट में अपील दायर की है। अपील में मांग की गई है कि चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई टाल दी जाए। बताते चलें कि धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू एवं कश्मीर में इस अनुच्छेद के तहत वही लोग नागरिक माने जाएंगे, जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक हो। इसके अलावा विगत 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो। इस दरम्यान या इससे पूर्व कोई संपति हासिल कर ली हो। अनुच्छेद 35A धारा 305 का अहम हिस्सा है। इस धारा के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक न तो वहां का नागरिक बन सकता और न ही कोई सम्पत्ति खरीद सकता है।

इस अनुच्छेद को इसलिए हटाया जा रहा

अनुच्छेद 35A को इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि यह संसद द्वारा लागू नहीं किया गया। इसके साथ ही दूसरा कारण यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान से आये शरणार्थी राज्य के मौलिक अधिकार और अपनी पहचान से वंचित है। इस अनुच्छेद को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल किया था। यह अनुच्छेद जम्मू एवं कश्मीर को स्थाई नागरिक की परिभाषा को तय करने का अधिकार देता है। जम्मू एवं कश्मीर को अनुच्छेद 35A के तहत कई विशेष अधिकार प्राप्त है।

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पिछले साल भी टाल दी गई थी सुनवाई

इस अनुच्छेद को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई पिछले वर्ष भी निकाय चुनाव होने के कारण टाल दी गई थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं की सुनवाई को टालते हुए कहा था कि "इस याचिका की सुनवाई अगले साल ही होगी।" वर्तमान में जम्मू एवं कश्मीर में राष्टपति शासन लागू है।

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