आसाराम को उम्रकैद, दो सहयोगियों को 20-20 साल की सजा

कोर्ट से आसाराम के दो सहयोगी हॉस्टल वार्डेन शिल्पी और हॉस्टल संचालक शरतचंद्र को 20-20 साल जेल की सजा हुई।

नई दिल्ली: नाबालिग लड़की से यौन शोषण के दोषी संत आसाराम को जोधपुर अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाते ही आसाराम फूट-फूट कर रोने लग गया और कहा कि ऊपर वाले की जैसी मर्जी होगी तो हम यहीं (जेल में) रहेंगे। आसाराम सुनवाई के दौरान बैरक में 15 मिनट तक प्रार्थना करता रहा। कोर्ट में पूरी सुनवाई के दौरान भी राम-राम जपता रहा। आसाराम के सेवादारों को भी सजा का ऐलान किया गया। कोर्ट से आसाराम के दो सहयोगी शिल्पी और शरतचंद्र को 20-20 साल जेल की सजा हुई। इससे पहले कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए शिवा उर्फ सवाराम (आसाराम का प्रमुख सेवादार), प्रकाश द्विवेदी (आश्रम का रसोइया) को बरी कर दिया । गौरतलब है कि आसाराम के वकील फैसले और सजा के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने सुबह में जेल में ही कोर्ट रूम तैयार कर फैसला सुनाया और फिर सजा का ऐलान किया। अब आसाराम को जीवनभर सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा।

आंखों से छलकने लगे आंसू

न्यायाधीश द्वारा दोषी करार देते ही कथा वाचक आसाराम सिर पकड़ कर बैठ गया और उसी समय वह राम नाम का जाप करने लगा। उम्र कैद की सजा सुनाते ही उसकी आखों में आसूं छलक पड़े। अदालत द्वारा दोषी करार देने के बाद सजा के बारे में दोनों पक्षों की ओर से दलील दी गयी। आसाराम के अधिवक्ताओं ने उनकी उम्र का हवाला देते हुये कम से कम सजा देने की दलील दी, लेकिन अदालत ने इसे नही माना।

न्याय से संतुष्टि मिली- पीडि़ता के पिता

इधर फैसला आने के बाद मामले में पीडि़ता के पिता की प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा, ''आसाराम दोषी करार दिया गया है। हमें न्याय मिल गया। मैं उन सभी का शुक्रिया करना चाहता हूं जिन्होंने इस जंग में हमारा साथ दिया। मुझे उम्मीद है कि उसे अब सख्त सज़ा मिलेगी। उम्मीद करता हूँ कि जो भी गवाह जिनकी या तो ह्त्या हुई या जिनका अपहरण हुआ उन्हें भी न्याय मिला होगा।

Prashant Jha
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