अयोध्या विवाद: मंदिर-मस्जिद पर SC में आज से सुनवाई, अदालत पर टिकी सबकी नजर

Dhirendra Mishra

Publish: Mar, 14 2018 09:04:54 AM (IST)

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अयोध्या विवाद: मंदिर-मस्जिद पर SC में आज से सुनवाई, अदालत पर टिकी सबकी नजर

देश के शीर्ष अदालत के समक्ष सभी पक्षकार राम मंदिर-मस्जिद विवाद पर आज से निर्णायक दलील पेश करेंगे।

नई दिल्ली. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई है। इस विवाद को लेकर शीर्ष अदालत आज नियमित सुनवाई की तारीख तय कर सकता है। इस मामले की सुनवाई पांच जजों की बेंच करेगी। इस केस से जुड़े पक्षकारों का कहना है कि इस मामले में समाधान की आस अब केवल सुप्रीम कोर्ट से ही है। अदालत का जो भी फैसला आएगा उसे सभी लोग मानेंगे। पक्षकारों का कहा है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे और आगे के लिए नहीं टाला जाना चाहिए।

अनुवाद न होने से टली थी सुनवाई
इससे पहले एक फरवरी को इस मामले की सुनवाई हुई थी। तब वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और गीता सहित 20 धार्मिक पुस्तकों से इस्तेमाल किए तथ्यों का अंग्रेजी में अनुवाद न होने से सुनवाई टालनी पड़ी थी। सुनवाई के दौरान पक्षकारों के वकील ने कहा था कि अयोध्या विवाद लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। इस पर मुख्‍य न्‍यायाधीश ने कहा था कि ऐसी दलीलें मुझे तर्कसंगत नहीं है। अब यह मसला सिर्फ भूमि विवाद का है।

मुख्य पक्षकारों मिलेगा पहले दलील पेश करने का मौका
सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी की सुनवाई में कहा था कि सबसे पहले इस विवाद से जुड़े मुख्‍य पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी। उसके बाद अन्‍य पक्षकारों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। आपको बता दें कि इस मामले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, राम लला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के अलावा एक दर्जन अन्य पक्षकार भी हैं।

2019 तक सुनवाई टालने की अपील
एक फरवरी को हुई चुनाव के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से इस केस की सुनवाई 2019 तक लोकसभा चुनावटालने की मांग की थी। उन्होंने अदालत से अपील की थी कि इसके प्रभाव को देखते हुए इस मामले की सुनवाई होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हम अदालत को यकीन दिलाते हैं कि हम किसी भी तरह से इसे और आगे नहीं बढ़ने देंगे। केवल न्याय ही नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा दिखना भी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये किस तरह की पेशकश है? इससे पहले मामले की सुनवाई क्‍यों नहीं हो सकती? इसका जवाब कपिल सिब्‍बल नहीं दे पाए थे। इसके बाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी सुनवाई को टालने की कई बार अपली कर चुके हैं।

पक्षकारों को है जल्‍द फैसला आने की आस
राम मंदिर के समर्थन में आए पक्षकारों का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 90 सुनवाई में ही फैसला दे दिया था। पक्षकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट 50 सुनवाई में फैसला दे सकता है। हालांकि बाबरी मस्जिद से जुड़े पक्षकारों का कहना है कि केस में दस्तावेजों का अंबार हैं, उन सभी पर प्वाइंट टू प्वाइंट दलीलें रखी जाएंगी। इसलिए इसमें ज्‍यादा समय लग सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को 3 हिस्सों में बांटने का दिया था आदेश
वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।

शिया बोर्ड का प्रस्‍ताव
उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्‍ताव पेश किया था। इसके मुताबिक विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद का नाम राजा या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन रखा जाए।

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