अयोध्या विवाद: मध्‍यस्‍थता की कोशिशें नाकाम, 6 अगस्त से नियमित सुनवाई

अयोध्या विवाद: मध्‍यस्‍थता की कोशिशें नाकाम, 6 अगस्त से नियमित सुनवाई

  • Ayodhya Dispute: एक बार फिर राम मंदिर बाबरी मस्जिद पर मध्‍यस्‍थता फेल
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा अब खुली अदालत में होगी नियमित सुनवाई
  • सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर बाबरी मस्जिद को लेकर लंबित हैं 14 मुकदमें

नई दिल्‍ली। शुक्रवार को अयोध्‍या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मध्‍यस्‍थता समिति ने शीर्ष अदालत को बताया कि वे इस विवाद का समाधान करने में सक्षम नहीं हैं। बता दें कि गुरुवार को अयोध्या विवाद मामले में गठित मध्यस्थता समिति की ओर से सीलबंद लिफाफे में फाइनल रिपोर्ट पेश की गई थी।

मध्‍यस्‍थता समिति द्वारा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान निकालने में असमर्थता जताने के बाद साफ हो गया है कि अब बातचीत के जरिए देश के सबसे बड़े विवाद का समाधान संभव नहीं है।

mediation panel

खुली अदालत में होगी सुनवाई

शुक्रवर को CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने इस मुद्दे पर सुनवाई की। अब 6 अगस्त से इस मामले की रोजाना खुली अदालत में सुनवाई होगी। मध्‍यस्‍थता समिति की राय जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता की कोशिशें फेल हो गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 30 अगस्‍त, 2010 के आदेश के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं की प्रतिदिन सुनवाई करने का फैसला किया है।

मध्‍यस्‍थता पैनल ने 7 मई को पेश की थी अंतरिम रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की पहल की थी। 8 मार्च, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्‍यों वाली मध्‍यस्‍थता समिति गठित की थी। इस विवाद से जुड़े सभी पक्षों से आपसी समझदारी से समाधान निकालने की स्थिति तक पहुंचने का आह्वान किया था।

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इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएमआई खलीफुल्ला बनाए गए थे। दो अन्य सदस्‍यों में आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल हैं।

इससे पहले अदालत ने अयोध्या की विवादित भूमि के मामले की सुनवाई प्रतिदिन शुरू करने के लिए 25 जुलाई की तारीख तय की थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्‍यस्‍थता पैनल ने 7 मई को एक सीलबंद लिफाफे में अंतरिम रिपोर्ट पेश की थी।

मध्‍यस्‍थता के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण हल निकालने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया था।

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