भीमा कोरेगांव मामला: कोर्ट ने दलित लेखक आनंद तेलतुंबडे के रिहाई के आदेश दिए

भीमा कोरेगांव मामला: कोर्ट ने दलित लेखक आनंद तेलतुंबडे के रिहाई के आदेश दिए

प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे पर नक्सलियों और यलगार परिषद के साथ संबंध रखने का आरोप है, जिसने कथित तौर पर पुणे में कोरेगांव-भीमा में एक जनवरी, 2018 के जातीय दंगों और हिंसा को भड़काया था।

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किए दलित बुद्धिजीवी, लेखक और प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे को रिहा करने का आदेश आया है। शनिवार को पुणे सत्र न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को हवाला देते हुए रिहा करने के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर रिहाई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे को 11 फरवरी तक अंतरिम संरक्षण प्राप्त है। इस दौरान वह चाहें तो जमानत/पूर्व-गिरफ्तारी जमानत के लिए सक्षम प्राधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। पुणे पुलिस ने तेलतुंबडे को मुंबई से गिरफ्तार किया है।

एयरपोर्ट से हुई तेलतुंबडे की गिरफ्तारी

पुणे पुलिस ने शनिवार तड़के मुंबई हवाईअड्डे से दलित बुद्धिजीवी व प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम हवाईअड्डे पर उनका इंतजार कर रही थी और उन्हें तड़के करीब 3.30 बजे छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के घरेलू टर्मिनल से गिरफ्तार किया गया। पुलिस टीम उन्हें लेकर पुणे के लिए रवाना हो गई। तेलतुंबडे को नक्सलियों से लिंक रखने के शक पर गिरफ्तार किया है।

नक्सलियों से संबंध रखने का शक

गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में पढ़ाने वाले तेलतुंबडे ने पुणे सेशंस कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के लिए इसे शुक्रवार को खारिज कर दिया गया था। उन पर प्रतिबंधित 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया' (माओवादी) और साथ ही यलगार परिषद के साथ संबंध रखने का आरोप है, जिसने कथित तौर पर पुणे में कोरेगांव-भीमा में एक जनवरी, 2018 के जातीय दंगों और हिंसा को भड़काया था।

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