पार्टी लाइन के खिलाफ लगातार बयान दे रहे भाजपा के बागी नेता अनिल शर्मा को निकाला गया

पार्टी लाइन के खिलाफ लगातार बयान दे रहे भाजपा के बागी नेता अनिल शर्मा को निकाला गया

  • हिमाचल प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री थे अनिल शर्मा
  • पार्टी के इस फैसले से आहत हूं- अनिल शर्मा
  • वीरभद्र सिंह की सरकार में मंत्री रह चुके हैं अनिल शर्मा

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है। हिमाचल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत्यपाल सिंह सत्ती ने कहा कि अनिल शर्मा को पार्टी से बाहर निकाल दिया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुग ने कहा कि जो कोई भी पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी करेगा उसके खिलाफ पार्टी कार्रवाई करेगी।

वहीं अनिल शर्मा ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। पार्टी से बाहर निकाले जाने पर अनिल शर्मा ने कहा कि वह पहले ही कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लेकिन पार्टी के इस फैसले से आहत हूं।

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अनिल शर्मा के बेटे और पिता कांग्रेस में शामिल

दरअसल कांग्रेस के टिकट पर अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा आम चुनाव 2019 में मंडी संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारे थे। अपने बेटे के चुनाव प्रचार का अनिल शर्मा ने समर्थन भी किया था। उस समय अनिल शर्मा हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा मंत्री थे। जब भाजपा ने अनिल शर्मा को मंडी में कांग्रेस के खिलाफ चुनाव प्रचार के लिए कहा तो उन्होंने इनकार कर दिया ।

जयराम ठाकुर की कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री थे अनिल शर्मा

अनिल शर्मा ने कहा था कि मेरे पिता सुखराम और बेटा आश्रय शर्मा 25 मार्च को कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पार्टी नेताओं को उसी वक्त मैंने जानकारी दे दी थी कि अगर कांग्रेस ने आश्रय को टिकट दिया तो मैं उसके खिलाफ प्रचार नहीं करूंगा। हालांकि, मंडी को छोड़कर अन्य सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने को तैयार हूं। लेकिन उसके बाद तल्खी बढ़ती गई। धीरे-धीरे सीएम जय राम ठाकुर की कैबिनेट से उन्हें बाहर कर दिया गया और 14 अगस्त को पार्टी ने उन्हें बाहर निकाल दिया।

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अनिल शर्मा कांग्रेस में मंत्री भी रहे

गौरतलब है कि अनिल शर्मा 1993 और 2012 में वीरभद्र सिंह की सरकार में कांग्रेस के मंत्री रहे । लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले वह पिता सुखराम के साथ भाजपा में शामिल हो गए । अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा मंडी लोकसभा सीट से भाजपा का टिकट मांग रहे थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। जिसके बाद आश्रय अपने दादा के साथ कांग्रेस में चले गए।

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