हिमाचल में मणिमहेश यात्रा शुरू, जानिए क्या है इसका महत्व

हिमाचल में मणिमहेश यात्रा शुरू, जानिए क्या है इसका महत्व

हिमाचल में मणिमहेश झील यात्रा शुरू हो चुकी है। यात्रा 17 सितंबर को राधा अष्टमी पर संपन्न होगी।

नई दिल्ली। हिमाचल के के भरमौर घाटी में सोमवार को धार्मिक उल्लास के साथ भगवान शिव को समर्पित पवित्र मणिमहेश झील के लिए 14 दिवसीय यात्रा शुरू हो गई। 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश के लिए तीर्थयात्रा संयोग से जन्माष्टमी के दिन शुरू होकर 17 सितंबर को राधा अष्टमी पर संपन्न होगी।

हर साल होती है ये यात्रा

बता दें कि हर साल भक्त कैलाश पर्वत की एक झलक पाने के लिए अंडाकार झील की यात्रा करते हैं और मननत मांगते हैं। कैलाश को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। उपायुक्त हरिकेश मीना ने बताया कि भक्तों की सुविधा के लिए तंबू और चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं।

नौकासे पार कराई जाती है पवित्र झील

तीर्थयात्रा के दौरान लोगों के नौकायन करने के लिए दो निजी हेली टैक्सी-संचालकों की अनुमति है। आपको बता दें कि झील के पास भरमौर और गौरी कुंड के बीच अब तक 300 से ज्यादा लोगों को नौका से पार उतारा जा चुका है। उन्होंने कहा यहां से करीब 65 किलोमीटर दूर हडसर आधार शिविर से लकेर मणिमहेश तक की 14 किलोमीटर के मार्ग की मरम्मत कराई गई है।

भगवन शिव के प्रश्न होने पर ही दिखता है कैलास पर्वत

वहीं, यात्रा की आधिकारिक रूप से शुरुआत से पहले ही हजारों श्रद्धालुओं ने यात्रा शुरू कर दी। भगवान शिव में आस्था रखने वाले भक्तों का कहना है कि कैलाश पर्वत को भक्त केवल तभी देख सकते हैं, जब भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। अगर पर्वत का शिखर बादलों के पीछे छिप गया तो यह शिव की अप्रसन्नता का संकेत है।

क्यों है मणिमहेश यात्रा का महत्व?

मणिमहेश यात्रा कब शुरू हुई, इसके बारे में अलग-अलग विचार हैं। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि यहां पर भगवान शिव ने कई बार अपने भक्तों को दर्शन दिए हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव इन्हीं पहाड़ों में रहते करते हैं। 13,500 फुट की ऊंचाई पर किसी प्राकृतिक झील का होना किसी दैवीय शक्ति का प्रमाण है। ह‍िंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हिमालय की धौलाधार, पांगी और जांस्कर शृंखलाओं से घिरा कैलाश पर्वत मणिमहेश-कैलाश के नाम से प्रसिद्ध है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से श्रीराधाष्टमी तक लाखों श्रद्धालु पवित्र मणिमहेश झील में स्नान के बाद कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

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