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कश्मीर में आतंकियों को धूल चटाने वाले चेतन चीता और शहीद प्रमोद कुमार को कीर्ति चक्र

यह शांति के दौरान देश का दूसरा सबसे बड़ा शौर्य सम्मान है।

नई दिल्लीAug 14, 2017 / 09:10 pm

Prashant Jha

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद निरोधी अभियान के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले सीआरपीएफ के दो कमांडिंग अफसर (सीओ) चेतन कुमार चीता और शहीद प्रमोद कुमार प्रतिष्ठित कीर्ति चक्र से सम्मानित करने का फैसला किया है। यह शांति के दौरान देश का दूसरा सबसे बड़ा शौर्य सम्मान है। इन दोनों के अलावा कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशनों में हिस्सा लेने वाले 38 जवानों को वीरता सम्मान से नवाजा जाएगा। वहीं 142 जवानों को नक्सल विरोधी अभियानों के लिए यह सम्मान दिया जाएगाा । हालांकि, सीआरपीएफ ने चेतन चीता और शहीद प्रमोद कुमार को सर्वोच्च शौर्य सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित करने की गृह मंत्रालय से सिफारिश की थी। कश्मीर में आतंकियों की 9 गोलियां लगने के बावजूद भी मौत को मात देने वाले सीआरपीएफ के कमांडिंग ऑफिसर चेतन चीता ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दोबारा से कोबरा टीम का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी।
गंभीर रूप से घायल हुए थे चेतन चीता

गौरतलब है कि आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान चेतन चीता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आनन फानन में कश्मीर से उन्हें दिल्ली के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अस्पताल पहुंचकर चेतना चीता का हाल जाना था। 

शहीद प्रमोद कुमार ने आतंकी हमला किया था विफल
सीआरपीएफ की 49वीं बटालियन के कमांडिंग अफसर प्रमोद कुमार ने कश्मीर में पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्रीनगर के नौहट्टा में अपनी जान की बाजी लगाकर आतंकवादी हमले को नाकाम किया था।

कोटा के चीता ने लश्कर हमला किया था नाकाम
45वीं बटालियन के कमांडिंग अफसर चेतन कुमार चीता ने इस साल 14 फरवरी को कश्मीर के बांदीपुरा जिले में लश्कर ए तैयबा के आतंकवादी हमले को नाकाम करते हुए न सिर्फ लश्कर कमांडर अबू मुसैब को ढेर कर दिया बल्कि मुठभेड़ में नौ गोलियां लगने के बाद मौत को भी शिकस्त दे दी। उनके इस अदम्य साहस की देश भर में तारीफ की जा रही है। फिलहाल चेतना चीता अपने घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।

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