...और इस तरह हुआ था पश्चिम बंगाल में रसगुल्ले का अविष्कार

ashutosh tiwari

Publish: Nov, 14 2017 08:38:22 PM (IST)

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...और इस तरह हुआ था पश्चिम बंगाल में रसगुल्ले का अविष्कार

आइए बताते हैं कि ये रसगुल्ला कैसे बना और इसको किसने बनाया।

नई दिल्ली। रसगुल्ले को लेकर लंबे वक्त से चला आ रहा विवाद आज खत्म हो गया। मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को रसगुल्ले के लिए भौगोलिक पहचान (जीआई) टैग मिल गया है। जीआई टैग मिलने से पश्चिम बंगाल में रसगुल्ला बनाने वालों को फायदा मिलने की उम्मीद है। रसगुल्ले को सीएम ममता बनर्जी विश्व स्तर पर राज्य की पहचान के रुप में पेश करना चाहती हैं। आइए बताते हैं कि ये रसगुल्ला कैसे बना और इसको किसने बनाया।

नोबिन दास ने किया था रसगुल्ले का आविष्कार
जानकार बताते 1498 में वास्को डीगामा के भारत आते ही पुर्तगाली व्यापारियों का बंगाल से संपर्क बढ़ गया। पुर्तगाली पनीर के बहुत बड़े शौकीन थे और उनकी वजह से बंगाल में छेने की डिमांड बढ़ती गई। जैसे-जैस मांग बढ़ती गई वैसे-वैसे भारत के व्यापरी दूध फाड़कर छेना बनाने लगे। इसके साथ बंगाल के व्यापारियों ने भी छेने के साथ कई प्रयोग किए। उस दौरान कोलकाता में नोबिन चंद्र दास नाम के एक हलवाई थे। उन्होंने भी छेने के साथ एक प्रयोग करने का सोचा। उन्होंने छेने को गोलाई का आकार दिया उसके बाद उसे चासनी में उबला और यहीं से छेने का आविष्कार हुआ। धीरे-धीरे इलाके में उनके रसगुल्ले की मांग बढ़ गई। लेकिन एक दिन अचानक से उनकी दुकान पर कुछ ऐसे लोग आए जिनकी वजह से रसगुल्ला पूरे देश में फेमस हो गया।

नोबिन दास को कहा जाता है रसगुल्ले का कोलंबस
दरअसल भगवान दास बागला जोकि एक बड़े व्यापारी थे। एक दिन अपने परिवार के साथ जा रहे थे। इस दौरान उनके बच्चों को प्यास लगी। भगवान दास नोबिन दास की दुकान पर अपने बच्चों को पानी पिलाने के लिए रुके। इस पर नोबिन दास ने उनको रसगुल्ला खाने को दिया। बच्चों को रसगुल्ला खूब पसंद आाय। ऐसे में भगवान दास का भी मन नहीं भरा और उन्होंने भी रसगुल्ला चखा। इसके बाद भगवान दास रसगुल्ले के दिवाने हो गए। वो बड़ी मात्रा में रसगुल्ले का ऑर्डर नोबिन दास को देने लगे। उन्होंने अपने जानने वालों को भी रसगुल्ले के बारे में बताया। जो-जो नोबिन दास के हाथों का बना रसगुल्ला खाता वो उनका दिवाना हो गया। इसके बाद से पूरे देश में रसगुल्ला प्रसिद्ध हो गया। नोबिन दास तो आज रसगुल्ले का कोलंबस कहा जाता है। इतना ही नहीं नोबिन दास ने ही संदेश और कस्तूरी पाक नाम की मिठाई का आविष्कार किया था जो आज काफी पसंद की जाती है।

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