जज विवाद: अब आधार समेत 8 मामलों पर संवैधानिक बेंच 17 जनवरी से करेगी सुनवाई

prashant jha

Publish: Jan, 14 2018 04:30:33 PM (IST) | Updated: Jan, 14 2018 04:37:11 PM (IST)

Miscellenous India
जज विवाद: अब आधार समेत 8 मामलों पर संवैधानिक बेंच 17 जनवरी से करेगी सुनवाई

यह पूरी जानकारी सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है।

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की कार्यशैली के खिलाफ 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से उपजे विवाद के बाद आधार की अनिवार्यता सबरीमाला में महिलाओं की प्रवेश पर प्रतिबंध समेत 8 मामलों पर शीर्ष कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच 17 जनवरी से सुनवाई करेगी। यह पूरी जानकारी सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। संविधान बेंच आधार अधिनियम की संवैधानिक वैधता, समलैंगिक संबंध बनाने को अपराध मानने को सही ठहराने के अपने ही फैसले पर पुनर्विचार करेगी। बेंच केरल के सबीरामाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के मुद्दे, दूसरे धर्म में शादी करने पर पारसी महिलाओं की पहचान खोने और आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे सांसद और विधायक को अयोग्य मानने समेत अन्य मुद्दों पर भी सुनवाई होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर संविधान पीठों का संयोजन को अपलोड नहीं किया गया है।

आधार की अनिवार्यता पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में आधार की अनिवार्यता पर भी सुनवाई होगी। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी सेवाओं और वेलफेयर स्कीम के लिए आधार को लिंक करने की मियाद 31 मार्च तक बढ़ा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच ने मामले में कहा था कि तमाम सेवाओं और वेलफेयर स्कीम के लिए आधार को लिंक करने की मियाद 31 मार्च की जाती है।

शादी शुदा पुरुष का अन्य महिलाओं के साथ संबंध बनाने वाली याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट शादीशुदा पुरुष किसी और शादीशुदा महिला के साथ संबंध बनाने पर भी सुनवाई करेगा। दरअसल शादी के बाद अवैध संबंध से जुड़े कानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार दिए जाने के लिए शीर्ष कोर्ट में सुनवाई चल रही है। उच्चतम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि आईपीसी की धारा-497 के तहत जो कानूनी प्रावधान है वह पुरुषों के साथ भेदभाव वाला है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी और शादीशुदा महिला के साथ उसकी सहमति से संबंध बनाता है तो ऐसे संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ उस महिला का पति व्यभिचार का केस दर्ज करा सकता है, लेकिन संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ मामला दर्ज करने का प्रावधान नहीं है। जो भेदभाव वाला है और इस प्रावधान को गैर संवैधानिक घोषित किया जाए।

पारसी महिला की अन्य धर्म में शादी करने पर पहचान खत्म करने का सुना जाएगा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत दूसरे धर्म के पुरुष से पारसी महिला की शादी पर करने पर दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे धर्म के पुरुष के साथ विवाह करने पर महिला का धर्म अपने आप पति वाला नहीं हो जाता। शादी के बाद महिला की व्यक्तिगत पहचान और उसका धर्म तब तक बना रहता है जब तक वह अपना धर्म परिर्वतन न कर ले।

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