सोशल मीडिया पर रानी लक्ष्मीबाई की तस्वीर को लेकर विवाद

रानी के जीवन काल की एकमात्र तस्वीर होने का दावा, इतिहासकारों ने नकारा...

नई दिल्ली । 19 नवंबर को रानी लक्ष्मी बाई की जयंती है। उससे पहले सोशल मीडिया पर रानी की तस्वीर पर विवाद छिड़ गया है। दरअसल टि्वटर हैंडल इंडियन हिस्ट्री पिक्स (@IndiaHistorypic) ने ये दावा करते हुए एक तस्वीर पोस्ट की है कि रानी लक्ष्मी बाई के जीवनकाल में बनाई गई ये एकमात्र तस्वीर है। साथ ही कहा है कि तस्वीर 1857 में फर्रुखाबाद पैलेस पर अंग्रेजों के कब्जे के दौरान मिली थी। ट्विटर हैंडल पर तस्वीर का स्रोत लंदन के चेल्सी में स्थित नेशनल आर्मी म्यूजियम को बताया है और उसका लिंक भी दिया है।

कुछ लोगों ने कमेंट्स में भी इसे रानी की तस्वीर मानने पर अशंका जताई है। म्यूजियम की वेबसाइट पर जाने पर एक ही फ्रेम में चार तस्वीरें दिखाई देती हैं। लेकिन वेबसाइट पर इस तस्वीर के रानी लक्ष्मीबाई की एकमात्र तस्वीर होने का दावा नहीं किया गया है। वेबसाइट पर लिखा है कि यह तस्वीर एक अज्ञात भारतीय कलाकार की ओर से हाथी दांत पर पानी के रंगों से बनाई गई है।

इतिहासकारों को भी संदेह
उधर इतिहासकारों ने इसे रानी लक्ष्मी बाई की तस्वीर मानने से इंकार किया है। आधुनिक भारत के इतिहासकार इरफान हबीब ने एक वेबसाइट को है कि ये तस्वीर असली है, इसका कोई सबूत नहीं है। तस्वीर में कोई तारीख भी नहीं है। तस्वीर के असली होने की पुष्टि कोई नहीं कर सकता, क्योंकि किसी ने लक्ष्मी बाई की असली तस्वीर नहीं देखी है। आजकल एक फैशन हो गया कि इतिहास को नए सिरे से और सनसनीखेज तरीके से पेश किया जाए।

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IMAGE CREDIT: national army museum

कौन थी रानी लक्ष्मी बाई
रानी लक्ष्मी बाई ऐसी वीरांगना थीं, जिनका नाम सुनकर अंग्रेजों को पसीने छूट जाते थे। रानी ने कई राज्य जीते थे। वे चाहती थीं कि अखंड भारत का निर्माण हो। 19 नवंबर को रानी लक्ष्मी बाई की जयंती है। इतिहासकारों के अनुसार लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर, 1827 को महाराष्ट्रियन कराडे ब्राह्म्ण परिवार में हुआ था। जन्म के बाद इनका नाम मणि‍कर्ण‍िका रखा गया, जोकि शादी के बाद बदलकर रानी लक्ष्मी बाई हो गया।
- 4 साल की उम्र में इनकी मां भागीरथी का निधन हो गया। इसके बाद वो अपने पिता मोरोपंत के साथ बाजीराव पेशवा के यहां बिठूर आ गईं।
- 1842 में रानी की शादी झांसी के राजा गंगाधर राव से हुई। 1851 में रानी ने बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम दामोदर राव रखा गया। किंतु जन्म के तीन महीने बाद ही दामोदर का निधन हो गया।
- बेटे की मौत के बाद उन्होंने दत्तक पुत्र को गोद लिया। उसका नाम भी दामोदर राव रखा। गोद लेने के एक दिन बाद ही पति गंगाधर राव का निधन हो गया।
- राजा गंगाधर ने अपने पूरे जीवन में कभी कोई युद्ध नहीं लड़ा। उन्होंने किले में एक नट्यशाला बनवाई थी, जिसमें रंगमंचन किया जाता था।
- लक्ष्मीबाई शादी के बाद भी युद्ध अभ्यास करती रहीं। 21 मार्च को जनरल ह्यूरोज के झांसी आने के बाद 1858 में रानी लक्ष्मीबाई का अंग्रेजों से युद्ध हुआ।
- 12 जून को पता चला कि अंग्रेजी फौज सिंध नदी के पास पहुंच गई। क्रांतिकारी फौज ने 16 जून को तोपों से कंपनी फौज पर हमला कर दिया। भयंकर गर्मी और तोपों की मार के कारण कंपनी सेना पहाड़ियों की तरफ बढ़ गई।
- 17 जून को कंपनी सेना ने पहाड़ियों से आक्रमण किया। रानी युद्ध के दौरान फूलबाग (ग्वालियर) में थीं। रानी, मुंदीर और रघुनाथ सिंह कुछ सिपाहियों सहित अपने दल से बिछड़ गए। अकेला देख अंग्रेजी सेना इन पर टूट पड़ी। कई अंग्रेजी सैनिकों ने रानी को घेर लिया और महारानी के सिर पर वार किया, जिससे उनकी दाहिनी आंख तक कट गई।
- इसी बीच उनके सीने में एक गोली आकर लगी, जिससे वो घोड़े की पीठ पर ही बेहोश हो गईं। उनके अंगरक्षक गुल मोहम्मद पठान रानी को गंगादास के आश्रम ले गए। यहीं वीरांगना ने प्राण त्याग दिए।
- अगले दिन 18 जून को सुबह करीब 9 बजे जब अंग्रेज अफसरों को इसकी सूचना मिली, तो वो गंगादास की कुटिया पहुंचे। तब उन्होंने 18 जून, 1858 को रानी की शहादत की घोषणा की

Navyavesh Navrahi
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