Coronavirus : SC के आदेश पर शिलांग जेल से रिहा हुए 94 कैदी

  • SC ने दिया था विचारणीय कैदियों को पेरोल या जमानत पर छोडने का आदेश
  • एक याचिका पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने दिया था आदेश
  • उच्चाधिकार समिति की सिफारिश पर लिया गया रिहा करने का निर्णय

नई दिल्ली। कोरोना संकट ( Corona Crisis ) को ध्यान में रखते हुए मेघालय सरकार ने मंगलवार को सजायाफ्ता 94 कैदियों को रिहा कर दिया। इन कैदियों को रिहा करने का निर्णय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मेघालय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एचएस थंगख्वी की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार समिति की सिफारिश पर लिया गया। उच्चाधिकार समिति का गठन उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में किया गया था।

इस समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में पैनल का गठन राज्य सरकार द्वारा जमानत, अंतरिम जमानत और पैरोल पर कैदियों की रिहाई पर चर्चा करने के लिए किया गया था। समिति ने जिला जेलों में भीड़ से निपटने के लिए जेल विभाग की तैयारियों पर विचार-विमर्श किया।

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कैदियों की रिहाई पर गंभीरता से विचार के बाद MSLSA ने एक बयान जारी कर बताया कि शिलांग जेल में 174 कैदियों की पहचान की गई जो राज्य की कुल जेल आबादी का 37.9 फीसदी है। कहा गया कि 31 मार्च, 2020 को जिला जेल शिलांग से 94 कैदियों को रिहा किया गया। ये सभी कैदी पूर्वी खासी हिल्स जिले से ताल्लुक रखते हैं।

इसके अलावा शिलांग के मावकासियांग इलाके में ऑब्जर्वेशन होम से 8 नाबालिगों को भी रिहा किया गया। एमएसएलएसए के बयान में कहा गया कि शिलांग, विलियमनगर, जवई, तुरा और नोंगपोह के मेघालय में पांच जिला जेलों में कुल 459 कैदी बंद हैं। बताया गया कि अन्य जिला जेलों में बंद कैदियों की रिहाई भी जिला विधिक सेवा की देखरेख में जल्द ही शुरू होगी। फिलहाल इन जेलों बंद कैदियो की रिहाई की पात्रता पर विचार विमर्श जारी है।

आपको बता दें कि कोरोना संकट के बाद से देशभर की जेलों से कैदियों को रिहा करने को लेकर कवायद चल रही है। कुछ दिन पहले उत्तराखंड में 716 कैदियों को बेल और पैरोल देकर छोड़ दिया गया। इनमें 205 कैदियों को पैरोल और 611 कैदियों को बेल पर रिहा किया जाएगा।

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हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने जेलों में बंद कैदियों की कोरोना से सुरक्षा के मामले का स्वत: संज्ञान लिया लिया था। शीर्ष अदालत ने बताया था कि कैदियों के बीच सुरक्षित शारीरिक दूरी रखनी सुनिश्चित करनी होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर केंद्र और सभी राज्यों को 50 साल से ज्यादा उम्र के कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत देने पर विचार करने के लिए निर्देश देने की मांग भी की गई।

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Dhirendra Reporting
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