Coronavirus: हैदराबाद यूनिवर्सिटी का दावा, जल्द तैयार होगी कोरोना की दवा

  • देश में जल्द हो सकेगा Coronavirus का इलाज
  • Hydrabad university का दावा
  • तैयार हो रही है जानलेवा वायरस की वैक्सीन

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना ( Coronavirus in india ) के कहर के बीच हर किसी को इंतजार है तो बस इस जानलेवा बीमारी से इलाज का। यही वजह है कि देशभर के डॉक्टर दिन-रात इस घातक वायरस से बचने के लिए दवा ढूंढने में लगे हुए हैं। अपने-अपने स्तर पर चिकित्सक कोरोनावायरस से इलाज का वैक्सीनेशन बनाने में जुटे हैं। इस बीच एक राहतभरी खबर सामने आई है।

यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद ने दावा किया है कि वो जल्द कोरोनावायरस की वैक्सीन तैयार कर लेंगे। यानी जल्द ही देश में कोरोना के मरीजों का इलाज हो सकेगा। यूनिवर्सिटी के जैव रसायन विभाग की एक संकाय सदस्य ने कोरोना वायरस को लिए एक टीका बनाया है। टीके को टी सेल एपिटोप्स कहा जाता है जो Covid-19 के सभी 'संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रोटीनों के परीक्षण के लिए है।'

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हैदराबाद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज की संकाय सदस्य डॉक्टर सीमा मिश्रा ने परीक्षण के लिए सेल एपिटोप्स नामक संभावित टीके उम्मीदवारों को डिजाइन किया है जो कोविड-19 के सभी संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रोटीनों के खिलाफ है।

ये वैक्सीन छोटे कोरोनवायरल पेप्टाइड्स हैं, जो अणुओं की कोशिकाओं की ओर से उपयोग किया जाता है। इन वायरल पेप्टाइड्स को नुकसान पहुंचाने वाली कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता तैयार की जा सके।

कम्प्यूटेशनल सॉफ्टवेयर के साथ शक्तिशाली इम्यूनोइंफोर्मेटिक्स का उपयोग करते हुए, डॉक्टर सीमा मिश्रा ने इन संभावित एपिटोप्स को इस तरह से डिजाइन किया है कि पूरी आबादी को इसका टीका लगाया जा सकता है।

आमतौर पर वैक्सीन तैयार करने में लगते हैं 15 साल

दरअसल आमतौर पर किसी टीके की खोज में 15 साल लगते हैं, लेकिन शक्तिशाली कम्प्यूटेशनल टूल ने लगभग 10 दिनों में इस वैक्सीन को बनाने में मदद की। वायरस को रोकने के लिए मानव कोशिकाओं की ओर से कितना प्रभाव इस्तेमाल किया जाएगा, इसके आधार पर संभावित टीकों की एक रैंक सूची तैयार की गई है।

मानव प्रोटीन पूल में मौजूद किसी भी मैच के साथ इस कोरोनवायरल एपिटोप्स मानव कोशिकाओं पर कोई विपरित असर नहीं डालते हैं इसलिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया वायरल प्रोटीन के खिलाफ होगी न की मानव प्रोटीन के।

हालांकि इन परिणामों को निर्णायक रूप प्रदान करने के लिए प्रयोगात्मक रूप से जांच की जानी है। इन परिणामों को तत्काल प्रयोगात्मक कसौटी पर परखने के लिए चेमआरजीव प्रीप्रिंट प्लेटफॉर्म का उपयोग करके वैज्ञानिक समुदाय में प्रसारित किया गया है।

एनकोव टीका डिजाइन पर ये भारत का पहला ऐसा अध्ययन है जो वायरस द्वारा बनाने ववाले संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रोटीनों में पूरे कोरोनवायरल प्रोटिओम की खोज करता है।'

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धीरज शर्मा Reporting
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