लॉकडाउन पर घर वापसी का दर्द: भूखे-प्यासे मजदूर, हजारों किलोमीटर सफर तय को मजबूर

  • रोजगार नहीं मिलने से हजारों मील दूर अपने घर पैदल निकलने को मजबूर
  • लॉकडाउन के चलते देशभर में मजदूर और कामगार घर निकल रहे
  • भूखे-प्यासे लोग अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं

 

शादाब अहमद/ प्रशान्त झा

नई दिल्ली। दुनिया के 175 से ज्यादा देश इस समय कोरोना वायरस से जुझ रहे हैं। भारत में भी इस वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में मरीजों की संख्या 750 के पार हो गई है। जबकि 16 लोगों की जान जा चुकी हैं। भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन है। ऐसे में लोग पलायन करने को मजबूर हैं। पुलिस- प्रशासन की सख्ती के बाद भी बाद भी बड़ी संख्या में लोग शहरों से भूखे-प्यासे हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए निकल रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल है। बड़े शहरों में कंपनियां बंद होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल के मजदूर अपने गांव का सफर पैदल ही तय कर रहे हैं । ऐसे में बड़ा सवाल है कि यह कष्टकारी यात्रा पर सरकार कब सूध लेगी। आखिर सरकार इन लोगों को रोकने के लिए कोई अलग से व्यवस्था कोई नहीं कर पा रही है।

कंपनियां और व्यापार बंद होने से घर लौट रहे मजदूर

दरअसल कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते केन्द्र सरकार ने देशभर में लॉकडाउन कर रखा हैै। इसके चलते फैक्ट्री और कारोबार पूरी तरह से बंद है। बंद होने के बाद हजारों लोग घर वापसी कर रहे हैं। ऐसे मजदूरों को उनके कार्यस्थल वाले शहरों में रोकने के सरकार के प्रयास सफल नहीं हो रहे हैं। जबकि शुक्रवार को लॉक डाउन का तीसरे दिन था। दिल्ली, नोएडा, जयपुर-दिल्ली हाइवे पर अलग-अलग जगह शुक्रवार को हजारों की संख्या में मजदूर अपने घरों की ओर लौट रहे हैं।

नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर दिखा पलायना का ये नजरा

लॉकडाउन के दौरान मजदूर बेबस नजर आ रहे हैं। कंपनियां बंद होने से दिहाड़ी मजदूरों का पैदल पलायन जारी है। नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर साधन नहीं चलने के चलते मजदूर मीलों का सफर पैदल चलने को मजबूर हैं। यमुना एक्सप्रेस वे पर खड़े भूखे प्यासे ये मजदूर को नहीं पता कि ये कब अपने घर पहुंचेंगे। फिर अपने मंजिल की ओर आगे बढ़ते जा रहे हैं। कोई बच्चे को गोद में लेकर आगे बढ़ रहा है तो कोई अपनी पीठ पर भारी बैग लादे निकल पड़ा है।

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लॉकडाउन पर घर वापसी का दर्द: भूखे-प्यासे मजदूर, हजारों किलोमीटर सफर तय को मजबूर

लोगों के हाथों में सिलेण्डर-चूल्हे भी

घर वापसी कर रहे मजदूर हाथों में बैग, कंधे पर सामान से भरा कट्टा और गैस सिलेण्डर, चूल्हे भी लेकर चल रहे हैं।

बांसवाड़ा से आगरा का पैदल सफर

मनोहरपुर के पास कानपुर निवासी नीरज बांसवाड़ा में फैक्ट्री बंद होने के बाद अपने साथियों के साथ पिछले दो दिन से पैदल आगरा की ओर जाते मिले। इस दौरान वह करीब 500 किलोमीटर से अधिक चल चुके हैं। वर्मा ने बताया कि बांसवाड़ा में फैक्ट्री में बेलदारी करते हैं। बंद होने के बाद खाने-पीने का इंतजाम नहीं हो रहा था। ऐसे में हमें अपने घर जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

पानी तक नहीं मिल रहा

बावल में एक कंपनी बंद होने के बाद वहां फैजाबाद निवासी दीपक वर्मा समेत करीब 40 से अधिक युवक पैदल घर जाते मिले। उन्होंने बताया कि कंपनी बंद होने के बाद बावल में उन्हें पीने का पानी तक नहीं मिल रहा। मकान मालिक ने भी कह दिया कि ऐसे कब तक चलेगा और घर लौटने की सलाह दी।

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सेठ ने भगाया, पुलिस ने मारे डंडे

अपने बेटे को कंधे पर बिठाकर ले जा रहे नसीम खान ने का दर्द तो कुछ ज्यादा ही कठिन है। नसीम खान ने बताया कि कंपनी बंद होने के बाद जयपुर से उनके सेठ ने भगा दिया। अब मुरादाबाद घर जा रहे हैं। जबकि उनके साथ चल रहे मुकीम ने नम आंखों के साथ लडख़ड़ाती आवाज में कहा कि दो दिन से किसी ने खाना नहीं खाया है। हम 30 लोगों को एक गाड़ी मिल गई थी, उसे पुलिस ने रोक लिया और हमें डंडे मारकर उतार दिया। अब पैदल जा रहे हैं।

फरिश्ता बनी दिल्ली पुलिस

दिल्ली सीमा में प्रवेश करते ही ऐसे पदयात्रियों का दिल्ली पुलिस सब्जी-पुढ़ी, बिस्किट और पानी से कर रही है। गुरुग्राम से दिल्ली सीमा पर पुलिसकर्मियों ने आपसी सहयोग से यह इंतजाम किया है। पुलिसकर्मियों ने बताया कि लोग कई किलोमीटर भूखे-प्यासे पैदल चल रहे हैं। यदि किसी के पास पैसा भी है तो भी वह कुछ नहीं खरीद सकता है। इसलिए यह इंतजाम किए गए हैं।

Prashant Jha
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