भारत ने ही रखा चक्रवात 'वायु' का नाम, ऐसे दिए जाते है तूफानों के नाम

भारत ने ही रखा चक्रवात 'वायु' का नाम, ऐसे दिए जाते है तूफानों के नाम

  • भारत से ही शुरू हुए चक्रवातों के नाम
  • 8 तटीय देशों ने मिलकर किया नाम रखने का समझौता
  • डेढ़ महीने में दूसरे बड़े तूफान ने दी भारत में दस्तक

नई दिल्ली। पीएम मोदी के गृह नगर गुजरात पर इस वक्त एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ये खतरा है चक्रवाती तूफान 'वायु' का। आपको बता दें कि डेढ़ महीने अंदर के ये दूसरा बड़ा तूफान है जो देश की सीमा में तबाही मचा सकता है। इससे पहले तूफान फानी ने देश के दक्षिण राज्य में जमकर कहर बरपाया था। बात तूफान की करें तो इन ये जान लेना जरूरी है कि आखिर इन तूफानों के नाम आते कहां से हैं। तूफानों के नामों के बारे में जानने से पहले आपको ये भी बता दें कि इस बार के तूफान 'वायु' का नाम भारत ने ही रखा है। वायु को लेकर अब तक गुजरात के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और दमन दीव मे ंहाई अलर्ट जारी किया गया है। कैसे आते हैं तूफानों के नाम, कौन तय करता इनका नाम आईए डालते हैं एक नजर।

भारत से आया 'वायु'
गुजरात की सीमा में दाखिल होने से पहले तूफान 'वायु' ने मुंबई के तटों पर कोहराम मचाया है। हालांकि मुंबई में इसकी गति 80 से 90 किमी प्रति घंटे रही। जबकि गुजरात से टकराने पर इसकी गति बढ़कर 135 किमी प्रति घंटे तक होने की उम्मीद है। आपको बता दें कि इससे पहले ओडिशा में तबाही मचाने वाले तूफान फानी की गति 200 किमी प्रति घंटा थी। इस बार आए तूफान वायु का नाम भारत ने ही रखा है। जबकि इससे पहले तूफान फानी का नाम पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने रखा था।

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भारत से ही शुरू हुए चक्रवातों के नाम
दुनिया में तूफानों के नाम की शुरुआत तो 1953 से हुई थी। लेकिन चक्रवातों के नाम 2004 से पड़ने लगे। खास बात यह है कि इसकी शुरुआत भारत से ही हुई। दरअसल भारत की पहल पर ही 8 तटीय देशों ने तूफानों के नाम को लेकर एक समझौता किया था।


इन देशों के बीच हुआ समझौता
समझौता करने वाले देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड शामिल हैं। अंग्रेजी वर्णमाला के मुताबिक सदस्य देशों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया गया है। जैसे ही चक्रवात इन आठ देशों के किसी हिस्से में पहुंचता है, सूची में मौजूद अगला सुलभ नाम इस चक्रवात का रख दिया जाता है। इससे तूफान की न केवल आसानी से पहचान हो जाती है बल्कि बचाव अभियानों में भी इससे मदद मिलती है।

 

हर नाम सिर्फ एक बार इस्तेमाल
चक्रवाती तूफानों के नाम रखने में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि हर नाम का इस्तेमाल सिर्फ एक बार ही हो। यानी जो नाम एक बार रख दिया जाता है उसे कभी दोबारा यूज में नहीं लाया जाता। अब तक चक्रवात के करीब 64 नामों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। कुछ समय पहले जब क्रम के मुताबिक भारत की बारी थी तब ऐसे ही एक चक्रवात का नाम भारत की ओर से सुझाये गए नामों में से एक 'लहर' रखा गया था।

इस खास संधि के तहत रखे गए नाम
तूफानों के नाम करण की शुरुआत चक्रवातों से पहले ही हो चुकी थी। दरअसल इसकी शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में एक संधि के तहत हुई थी। अटलांटिक क्षेत्र में ह्यूरिकेन और चक्रवात का नाम देने की परंपरा तभी से चली आ रही है। जो मियामी स्थित नैशनल हरिकेन सेंटर की पहल पर शुरू हुई थी। उस दौरान अमरीका सिर्फ महिलाओं के नाम पर तो ऑस्ट्रेलिया केवल भ्रष्ट नेताओं के नाम पर तूफानों का नाम रखते थे। लेकिन 1979 के बाद से एक मेल व फिर एक फीमेल नाम रखा जाने लगा है।

 

नामकरण से ये फायदा
तूफानों और चक्रवातों के नामकरण से कई तरह के फायदे होते हैं, सबसे बड़ा जो फायदा है वो है इससे पहचान जल्द हो जाती है और इससे निपटने में आसानी होती है। इनके नामकरण के पीछे ये भी कारण है कि इसे वैज्ञानिक और आम जनता को याद रख सकें। आपको बता दें अब तक 32 तूफानों की सूची में भारत ने चार नाम दिए हैं इनमें लहर, मेघ, सागर और वायु प्रमुख हैं। भारत का दिया वायु ही इस बार गुजरात समेत अन्य तटीय इलाकों पर टकरा रहा है। वहीं इससे पहले तूफान बांग्लादेश 'हेलेन' नाम दे चुका है। जबकि 'फानी' नाम भी बांग्लादेश का दिया हुआ है। पिछले वर्ष आए तूफान तितली का नाम पाकिस्तान ने दिया था। वहीं ओमान ने ;हुदहुद' और म्यांमार ने 'नानुक' तूफान का नाम दिया।

आने वाले तूफानों के नाम
आगामी तूफानों में गाजा, फेथाई, हिक्का, क्यार, माहा, बुलबुल, पवन और अम्फान हैं। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी तूफान उत्तरी हिंद महासागर से संबंधित हैं।

 

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