कभी corona का सबसे बड़ा HotSpot था ये शहर, अब COVID-19 के टॉप 10 से हुआ बाहर

  • COVID-19 के मामले में Delhi की लंबी छलांग
  • Corona Case के मामले में टॉप 10 से बाहर हुआ देश की राष्ट्रीय राजधानी

नई दिल्ली। एक ओर जहां पूरा देश कोरोना वायरस (coronavirus in India ) से लगातार जूझ रहा है। वहीं, देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ( coronavirus in Delhi ) में इस महामारी की रफ्तार कम हो गई है। आलम ये है कि कोरोना के नए मामले लगातार कम हो रहे हैं, वहीं मौत का आंकड़ा भी कम हुआ है। आलम ये है कि COVID-19 को लेकर कभी देश का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट ( COVID-19 HotSpot ) माने वाल दिल्ली अब टॉप 10 से बाहर होकर 11वें पायदान पर पहुंच चुका है।

COVID-19 में दिल्ली से बड़ी खुशखबरी

दरअसल, एक समय था जब देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ( coronavirus in Delhi ) में कोरोना वायरस के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। औसतन तीन से चार हजार नए मामले रोज आ रहे थे। लेकिन, वर्तमान समय में दिल्ली COVID-19 के एक्टिव मामले में 11वें नंबर पर पहुंच गई है। दिल्ली में अब केवल 7.99 प्रतिशत एक्टिव केस बचे हैं। जबकि, 89.07 प्रतिश मरीज इस महामारी से ठीक हो चुके हैं। वहीं, 2.93 प्रतिशत कोरोना मरीज (corona Patient) की मौत हो चुकी है। आलम ये है कि फिहला दिल्ली में औसतन रोजाना एक हजार के करीब नए केस ( corona New Cases ) सामने आ रहे हैं।

'लगातार सुधर रहे हैं हालात'

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (COVID-19 in Delhi) में अब तक 10 लाख से अधिक कोरोना की जांच हो चुकी है। इनमें आधे मामले की जांच पिछले 30 दिनों में हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 10,13,694 सैंपल की जांच हुई है। मतलब ये हुआ कि 10 लाख आबादी पर 53,352 सैंपल की जांच हुई है। दरअसल, जब मामले ज्यादा आने लगे तो टेस्ट ( corona Test ) की क्षमता भी बढ़ा दी गई थी। जून महीने तक दो से तीन हजार तक रोजान नए मामले सामने आ रहे थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल जुलाई महीने में 3.82 लाख रैपिड एंटीजन टेस्ट हुए हैं। खुद CM अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) औऱ कुछ विशेषज्ञ भी कह चुके हैं दिल्ली में अब हालत सुधर चुकी है और यहां नए मामले में अब नहीं बढ़ेंगे। इतना ही नहीं CM केजरीवाल ( Arvind Kejriwal on coronavirus ) ने गुरुवार को कोरोना से होने वाले मौत की जांच के लिए चार कमिटी की भी गठन कर दी है। हर कमिटी में चार-चार डॉक्टर होंगे। इन्हें जिम्मेदारी दी गई है कि किन हॉस्पिटल ( Hospital ) में ज्यादा मौतें हो रही हैं और क्यों हो रही हैं इसका पता लगाया जाए। अब देखना यह है कि दिल्ली में इसी तरह मामले कम होते जाएंगे फिर कुछ और परिणाम सामने आता है।

Kaushlendra Pathak
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