26/11 हमले के बाद बदल गई देविका की जिंदगी, लोग कहते थे 'कसाब की बेटी'

26/11 हमले के बाद बदल गई देविका की जिंदगी, लोग कहते थे 'कसाब की बेटी'

नई दिल्ली। मुंबई पर हुए 26/11 आतंकी हमले को 10 साल पूरे होने वाले हैं। भले ही इस हमले को एक दशक हो गया लेकिन आज इसके जख्म हर किसी के जहन में ताजा हैं। पूरा देश इस दिल दहला देने वाला पाकिस्तानी हमले से दहल उठा था। साल 2008 में हुए उस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उन्हीं लोगों में से एक थी देविका रोटावन। वो उस वक्त देविका महज 9 साल की थी। हमले में देविका के पैर में गोली लगी थी, उन्हें कई महीने अस्पताल में गुजारने पड़े।


शिवाजी टर्मिनल की घेराबंदी के दौरान अजमल कसाब ने देविका को गोली मारी थी। कसाब की इस गोली के बाद से ही देविका को पूरी दुनिया जानने लगी। खास बात यह है कि उसे कोर्ट में कसाब की पहचान करने के लिए भी बुलाया गया। आपको बता दें कि कसाब उस आतंकी हमले में अकेला बचा आतंकी था।

'कसाब की बेटी' का मिलता था ताना
26-11 हमले में कसाब की गोली से भले ही देविका का शरीर जख्मी हुआ हो लेकिन इसका दर्द उसे लंबे समय तक झेलना पड़ा। देविका जब स्कूल गई तो उन्हें वो सब देखना पड़ा जिसकी उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी। स्कूल में अब कोई उनका दोस्त नहीं बचा था, सभी सहपाठी उनसे दूर भागने लगे।

अंग्रेजी अच्छी नहीं
देविका के मुताबिक उन्हें सब कसाब की बेटी कहते थे। वह रोते हुए अपने घर जाती थीं क्योंकि लड़कियां उन्हें परेशान करती थीं। इसके बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और दूसरे स्कूल में दाखिला लिया। लेकिन यहां भी मुश्किलें कम नहीं हुईं। देविका ने एक आतंकी की पहचान की थी, इस स्कूल में भी सब उनसे डरने लगे। एक अन्य स्कूल ने उन्हें ये कहकर दाखिला देने से मना कर दिया कि उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है।

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धीरज शर्मा
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