डेंगू से लड़ना आसानः दुनिया में पहली बार भारत में बनी 'आयुर्वेदिक दवा'

डेंगू से लड़ना आसानः दुनिया में पहली बार भारत में बनी 'आयुर्वेदिक दवा'

दुनिया में पहली बार भारत में बनी डेंगू के इलाज के लिए 'आयुर्वेदिक दवा'।

नई दिल्ली। हर साल डेंगू से भारत सहित दुनिया भर में सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसका मुख्य कारण डेंगू के लिए सही और सटीक दवा का अभाव होना है, लेकिन भारत ने इस अभाव को कम करने की ओर कदम बढ़ा दिया है। सिर्फ देश में नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने डेंगू के इलाज के लिए दवा तैयार कर ली है। बता दें कि यह दवा पूरी तरह से आयुर्वेदिक है। इस दवा को 7 तरह के औषधीय पौधों से तैयार किया गया है।

इस दवा की मरीजों पर की गई पायलट स्टडी भी सफल रही है। अब इस दवा का बाजार में आना बाकी है, लेकिन बाजार में दवा के उतारने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के तहत बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रॉयल किए जा रहे हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2019 तक डेंगू के उपचार के लिए आम मरीजों तक यह दवा बाजार में उपलब्ध करा दी जाएगी।

डेंगू के लिए नहीं थी कोई दवा

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को मानें तो दुनिया में हर साल डेंगू इंफेक्शन के पांच से 10 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। यह बीमारी सबसे ज्यादा बच्चों को अपनी चपेट में लेती है। रिपोर्ट के मुताबिक डेंगू के इलाज के लिए अभी तक कोई दवा मौजूद नहीं थी। सिर्फ बुखार कम करने के लिए पैरासिटामॉल दी जाती है।

वैद्यों ने बनाई दवा

आपको बता दें कि डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए इसकी दवा आयुष मंत्रालय के शोध संस्थान सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च ने आयुर्वेद द्वारा बनाई गई है। इस दवा को बनाने में सीसीआरएएस के एक दर्जन से अधिक वैद्य (विशेषज्ञ) को दो साल से भी ज्यादा का वक्त लगा है।

चल रहा है क्लीनिकल ट्रायल
दवा के तैयार होने के बाद इसका ट्रायल चल रहा है। सीसीआरएएस और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बलगाम और कोलार मेडिकल कॉलज में डेंगू मरीजों पर बड़े स्तर पर इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल कर रहा है। बता दें कि दवा की विश्वसनीयता के लिए तीन स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल करने का निर्णय लिया गया है। क्लीनिकल ट्रायल सितंबर-2019 तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा।

90 मरीजों पर ट्रायल

बता दें कि सबसे पहले डेंगू के उपाचर के लिए तैयार की गई दवा का चूहों और खरगोश पर सफल अध्ययन किया गया था। अध्ययन के सफल होने के बाद पायलट स्टडी के तौर पर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 30-30 मरीजों को यह दवा दी गई। दवा देने के बात ऐसे नतीजे पाए गए कि दवा से मरीज के ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा जरूरत के अनुसार बढ़ती गई। एक भी मरीज पर किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ।

दवा का कोर्स
डेंगू की इस दवा का डोज सात दिनों का तय किया गया है। डेंगू के मरीजों को दिन में दो बार एक-एक टैबलेट लेनी पड़ेगी। कीमत को लेकर ऐसी ख़बरे हैं कि इस दवा के दाम बहुत ज्यादा नहीं होंगे।

2019 में आ सकती है दवा

सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद के महानिदेशक, वैद्य प्रो. केएस धिमान ने कहा, ''दुनिया में पहली बार डेंगू के उपचार हेतु यह दवा विकसित की गई है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी बात है पायलट स्टडी में इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स सामने नहीं आए हैं। वहीं, अगले साल सितंबर तक क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत उस कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी, जो दवा को तैयार कर बाजार में लाने के लिए तैयार होगी।"

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