Lockdown: 10 साल तक रहेगा Coronavirus का असर, सटीक भविष्यवाणी करने वाले डाॅ. डूम ने दी चेतावनी

-भारत समेत पूरी दुनिया इस समय कोरोना ( Coronavirus ) संकट से जूझ रही है। कोरोना संक्रमण को रोकने लिए तमाम देशों में लॉकडाउन ( Lockdown ) के कारण आर्थिक संकट ( Economic Crisis ) गहराता जा रहा है।
-महान अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ( Economist Nouriel Roubini ) ने कोरोना वायरस को लेकर चेतावनी दी है।
-Covid-19 Update: अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ने कहा है कि अगले 10 साल तक दुनिया पर कोरोना वायरस ( Coronavirus Impact on Economy ) का असर रहेगा।

नई दिल्‍ली।
भारत समेत पूरी दुनिया इस समय कोरोना ( Coronavirus ) संकट से जूझ रही है। दुनिया में अब तक 53 लाख से ज्यादा लोग वायरस ( COVID-19 ) से संक्रमित हो चुके है। जबकि, 3 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। कोरोना संक्रमण को रोकने लिए तमाम देशों में लॉकडाउन ( Lockdown ) जारी है। जिसके कारण आर्थिक संकट ( Economic Crisis ) गहराता जा रहा है।

इसी बीच महान अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ( Economist Nouriel Roubini ) ने कोरोना वायरस को लेकर चेतावनी दी है। अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ने कहा है कि अगले 10 साल तक दुनिया पर कोरोना वायरस ( Coronavirus Impact on Economy ) का असर रहेगा। उन्होंने चेताया है, कोरोना संकट के चलते देशों की अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक गिरावट और मंदी ( Economic Recession ) रह सकती है।

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सालों तक रहेगा कोरोना का प्रभाव
अपनी सटीक भविष्यवाणी के लिए जाने वाले नूरील ने कहा कि कोरोना संकट के चलते लाखों नौकरियां चली गईं, वो कभी वापस नहीं आएंगी, क्योंकि बाजार सालों तक तेज रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा। बता दें कि नूरील रूबिनी को डॉक्टर डूम के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 10 साल तक अवसाद और ऋण को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा, “भले ही देश की अर्थव्यवस्था इस वर्ष ही ठीक हो जाए, लेकिन फिर भी कोरोना वायरस के प्रभाव से हालत ठीक नहीं रहेंगे।”

2008 के वित्तीय संकट को लेकर की थी सटीक भविष्यवाणी
नूरील रूबिनी ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि कई कह रहे हैं कि इस साल अर्थव्यवस्था ठीक हो जाएगी, लेकिन यह भी सिर्फ भ्रम पैदा करने जैसा है। बता दें कि साल 2008 में जब किसी को वैश्विक मंदी का पता नहीं था, तब सबसे पहले रोबिनी ने ही बताया था अमेरिका का बाजार धड़ाम होने वाला है। उनकी यह बात सच साबित हुई। उस वक्त पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा था।

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ग्रेट डिप्रेशन में दुनिया
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, हर रिकवरी ‘यू’ या फिर ‘एल’ आकार की होगी। रोबिनी ने बताया कि यू-आकार की रिकवरी में विकास में गिरावट होती है और फिर लंबे समय तक नहीं बढ़ने के आसार होते है। वहीं, एल-आकार की रिकवरी और भी अधिक कठोर है। इसमें विकास बहुत तेजी से गिरता है और लंबे समय तक हालात ऐसे ही बने रहते हैं। ऐसी ही स्थिति कोरोना के कारण उत्पन्न हुई है। जिसका असर अमीर एवं गरीब दोनों देशों में दिखेगा।

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