पासपोर्ट बनवाना हुआ और आसान, अब वेरिफिकेशन के लिए घर नहीं आएगी पुलिस

पासपोर्ट की वेरिफिकेशन के लिए अब पुलिस आपके घर नहीं आएगी। अगले साल से शुरू होगी सुविधा। 

नई दिल्ली। पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अगर आप पासपोर्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ लें। अगले साल से पासपोर्ट के लिए होने वाली पुलिस की घर जाकर जांच करने की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। इसके चलते पुलिस को आवेदक के घर जाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार जल्द ही सीसीटीएनएस (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम्स परियोजना ) योजना के तहत डिजिटल पोर्टल शुरू किया है। जो कि अपराधों और अपराधियों का राष्ट्रीय ब्योरा तैयार करेगा। । सरकार का मुख्य लक्ष्य इस सीसीटीएनएस से पासपोर्ट सेवा को जोड़ने की है। इस योजना से एक साल में पासपोर्ट आवेदकों का ऑनलाइन सत्यापन पुलिस द्वारा खुद जाकर सत्यापन करने की व्यवस्था की जगह लेगा। बता दें कि इस योजना के प्रस्ताव को 2009 के समय पहली बार रखा गया था जब कांग्रेस की सरकार थी।

सीसीटीएनएस सुविधा से निकलेगा आवेदक का पुराना रिकॉर्ड
केंद्रीय गृह सचिव राजीव मेहरिशी मे कहा कि सीसीटीएनएस के ऐसा राष्ट्रीय डेटाबेस होगा जिसमें आवदेक के बारे में यह पता लग जाएगा कि उसका संबध किसी अपराध से तो नहीं है। यह सीसीटीएनएस डेटाबेस, विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट की सुविधा से जुड़ेगा। महर्षि ने रिपोर्ट्स में कहा कि कुछ राज्यों में पासपोर्ट संबंधी वेरिफिकेशन को पूरा करने के लिए पुलिस पहले से ही सीसीटीएनएस का उपयोग कर रही है। पुलिस को आवेदक के पते पर जाने के लिए हाथ में पकड़े जा सकने वाले उपकरण दिए जाएंगे। जिससे वह पुलिस वाला आवेदक की सारी जानकारियां नेटवर्क पर डालेगा। इस प्रकिया से न सिर्फ आवेदक का समय बल्कि पुलिस भी पासपोर्ट के लिए वेरिफिकेशन जल्द कर पाएगी। इससे आवेदक को पासपोर्ट भी जल्द मिल पाएगा।

हैक न हो इसके लिए कड़े इंतजाम
गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सीसीटीएनएस के लॉन्च के बाद महर्षि ने कहा कि हमारा लक्ष्य देशभर के करीब 15,398 थानों में इस सुविधा की शुरूआत करना है। साथ ही इस सुविधा के तहत 5 हजार अतिरिक्त शीर्ष पुलिस अधिकारियों के कार्यालय को जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी मदद से जब आवेदक उस मशीन पर अपनी डिटेल्स डालेगा तो मशीन आवदेक के भूतकाल का रिकॉर्ड आसानी से चैक कर पाएगी। जिससे पुलिस को काफी आसानी होगी। उन्होंने कहा कि यह भी बात उठ सकती है कि अगर मशीन को ही हैक कर लिया तो, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे केस में हैक होने की संभावना रहती है। लेकिन इस काम के लिए हम राष्ट्रीय क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर को जोड़ रहे है जो कि उसे हैक होने से बचाएगा। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा कि सीसीटीएनएस की सुविधा 15,398 पुलिस थानों में से 13,775 में शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अभी सीसीटीएनएस के पास लगभग 7 करोड़ अपराधियों का रिकॉर्ड है।

Ravi Gupta
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